श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ५ March 24, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पाँचवाँ अध्याय हिरण्यकशिपु के द्वारा प्रह्लादजी के वध का प्रयत्न नारदजी कहते हैं — युधिष्ठिर ! दैत्यों ने भगवान् श्रीशुक्राचार्यजी को अपना पुरोहित बनाया था । उनके दो पुत्र थे — शण्ड और अमर्क । वे दोनों राजमहल… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ४ March 24, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौथा अध्याय हिरण्यकशिपु के अत्याचार और प्रह्लाद के गुणों का वर्णन नारदजी कहते हैं — युधिष्ठिर ! जब हिरण्यकशिपु ने ब्रह्माजी से इस प्रकार के अत्यन्त दुर्लभ वर माँगे, तब उन्होंने उसकी तपस्या से प्रसन्न होने के कारण… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ३ March 24, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसरा अध्याय हिरण्यकशिपु की तपस्या और वरप्राप्ति नारदजी ने कहा — युधिष्ठिर ! अब हिरण्यकशिपु ने यह विचार किया कि ‘मैं अजेय, अजर, अमर और संसार का एकछत्र सम्राट् बन जाऊँ, जिससे कोई मेरे सामने खड़ा तक न… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय २ March 24, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय २ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दूसरा अध्याय हिरण्याक्ष का वध होने पर हिरण्यकशिपु का अपनी माता और कुटुम्बियों को समझाना नारदजी ने कहा — युधिष्ठिर ! जब भगवान् ने वराहावतार धारण करके हिरण्याक्ष को मार डाला, तब भाई के इस प्रकार मारे जाने… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय १ March 24, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पहला अध्याय नारद-युधिष्ठिर-संवाद और जय-विजय की कथा राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! भगवान् तो स्वभाव से ही भेदभाव से रहित हैं — सम हैं, समस्त प्राणियों के प्रिय और सुहृद हैं; फिर उन्होंने, जैसे कोई साधारण… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय १९ March 23, 2019 | aspundir | 1 Comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उन्नीसवाँ अध्याय पुंसवन-व्रत की विधि राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! आपने अभी-अभी पुंसवन-व्रत का वर्णन किया है और कहा है कि उससे भगवान् विष्णु प्रसन्न हो जाते हैं । सो अब मैं उसकी विधि जानना चाहता… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय १८ March 23, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अठारहवाँ अध्याय अदिति और दिति की सन्तानों की तथा मरुद्गण की उत्पत्ति का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! सविता की पत्नी पृश्नि के गर्भ से आठ सन्तानें हुई — सावित्री, व्याहृति, त्रयी, अग्निहोत्र, पशु, सोम, चातुर्मास्य… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय १७ March 23, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्रहवाँ अध्याय चित्रकेतु को पार्वतीजी का शाप श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! विद्याधर चित्रकेतु, जिस दिशा में भगवान् सङ्कर्षण अन्तर्धान हुए थे, उसे नमस्कार करके आकाशमार्ग से स्वच्छन्द विचरने लगे ॥ १ ॥ महायोगी चित्रकेतु करोड़ों वर्षों… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय १६ March 22, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय १६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सोलहवाँ अध्याय चित्रकेतु का वैराग्य तथा सङ्कर्षणदेव के दर्शन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! तदनन्तर देवर्षि नारद ने मृत राजकुमार के जीवात्मा को शोकाकुल स्वजनों के सामने प्रत्यक्ष बुलाकर कहा ॥ १ ॥ देवर्षि नारद ने कहा… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय १५ March 22, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय १५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पंद्रहवाँ अध्याय चित्रकेतु को अङ्गिरा और नारदजी का उपदेश श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! राजा चित्रकेतु शोकग्रस्त होकर मुर्दे के समान अपने मृत पुत्र के पास ही पड़े हुए थे । अब महर्षि अङ्गिरा और देवर्षि नारद… Read More