भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय १ December 23, 2018 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय भाग – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – १ उद्यान-प्रतिष्ठा-विधि सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणों ! उद्यान आदि की प्रतिष्ठा में जो कुछ विशेष विधि है, अब उसे बता रहा हूँ, आपलोग सुनें । सर्वप्रथम एक चौकोर मण्डल की… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय १९ से २१ December 23, 2018 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय १९ से २१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – १९ से २१ प्रतिष्ठा-मुहूर्त एवं जलाशय आदिकी प्रतिष्ठा-विधि सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणों ! ऋषियों ने देवता आदि की प्रतिष्ठा माघ, फाल्गुन आदि छः मास नियत किये हैं । जब… Read More
रक्षोघ्न सूक्त December 23, 2018 | aspundir | Leave a comment ॥ रक्षोघ्न सूक्त ॥ ऋग्वेदः – मण्डल ४ सूक्तं ४.४ ऋषि वामदेवो गौतमः छन्दः त्रिष्टुप् शुक्लयजुर्वेदः/अध्यायः १३ । ९-१३ तैत्तिरीयसंहिता(विस्वरः)/काण्डम् १/प्रपाठकः २ अनुवाक १४… Read More
रात्रिसूक्त December 23, 2018 | aspundir | Leave a comment ॥ रात्रिसूक्त ॥ ऋग्वेद के दशम मण्डल दशम अध्याय का १२७वाँ सूक्त रात्रिसूक्त कहलाता है, इसमें आठ ऋचाएँ पठित हैं, जिनमें रात्रिदेवी की महिमा का गान किया गया है । इस सूक्त में बताया गया है कि रात्रिदेवी जगत् के समस्त जीवों के शुभाशुभ कर्मों की साक्षी है और तदनुरूप फल प्रदान करती हैं ।… Read More
देवी-सूक्त / वाक्-सूक्त / आत्म-सूक्त / अम्भृाणी-सूक्त December 23, 2018 | aspundir | Leave a comment देवी-सूक्त / वाक्-सूक्त / आत्म-सूक्त / अम्भृाणी-सूक्त भगवती पराम्बा के अर्चनपूजन के साथ देवीसूक्त के पाठ की विशेष महिमा है । ऋग्वेद के दशम मण्डल दशम अध्याय का १२५वाँ सूक्त जिसमें आठ ऋचाएँ हैं ‘वाक्-सूक्त’ कहलाता है । इसे ‘आत्मसूक्त’ भी कहते हैं । इसमें अम्भृण-ऋषि की पुत्री वाक् ब्रह्मसाक्षात्कार से सम्पन्न होकर अपनी… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय १७ से १८ December 23, 2018 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय १७ से १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – १७ से १८ अधिवासन-कर्म एवं यज्ञ-कर्म में उपयोज्य उत्तम ब्राह्मण तथा धर्मदेवता का स्वरूप सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणों ! देव-प्रतिष्ठा के पहले दिन देवताओं का अधिवासन करना चाहिये और… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय १४ से १६ December 23, 2018 | aspundir | Leave a comment ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – १४ से १६ कुशकण्डिका-विधान तथा अग्नि-जिह्वाओं के नाम सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणों ! अब मैं याग-विशेषों में स्वगृह्याग्नि-विधि कह रहा हूँ । अपनी वेदादि शाखा के अनुकूल ही गृह्माग्नि-विधि करनी चाहिये । दूसरे की शाखा के विधान से याग-विशेषों का अनुष्ठान करने पर… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय १० से १३ December 23, 2018 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय १० से १३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – १० से १३ वास्तु-मंडल के निर्माण एवं वास्तु-पूजन की संक्षिप्त विधि सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणों ! अब मैं वास्तु मण्डल का संक्षित वर्णन कर रहा हूँ । पहले भूमि… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय ९ December 23, 2018 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय ९ गोत्र-प्रवर आदि के ज्ञान की आवश्यकता सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणों ! गोत्र-प्रवर की परम्परा को जानना अत्यन्त आवश्यक होता है, इसलिये अपने-अपने गोत्र या प्रवर को पिता, आचार्य तथा शास्त्र द्वारा… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय ७ से ८ December 23, 2018 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय ७ से ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय ७ से ८ काल-विभाग, तिथि-निर्णय एवं वर्षभर के विशेष पर्वो तथा तिथियों के पुण्यप्रद कृत्य सूतजी बोले — ब्राह्मणों ! देव-कर्म या पैतृक-कर्म काल के आधार पर ही सम्पन्न होते हैं… Read More