विद्वेषण का सफल-तम मन्त्र January 20, 2016 | aspundir | Leave a comment विद्वेषण का सफल-तम मन्त्र यह प्रयोग दो घनिष्ठ प्रेमियों के मध्य शत्रुता उत्पन्न कराता है । शान्तिक-पौष्टिक कर्मो को छोडकर शेष सभी कर्म, तन्त्र में, ‘अभि-चार’-कर्मो की श्रेणी में आते हैं । ‘विद्वेषण’ भी अभिचार-कर्म होने के कारण निन्दनीय माना गया है क्योकि ये कर्म लोक-हित में नहीं, अपितु स्वार्थ-सिद्धि में उपयोग किए जाते हैं,… Read More
स्वप्न में अङ्क ज्ञात होना January 20, 2016 | aspundir | 1 Comment स्वप्न में अङ्क ज्ञात होना मन्त्रः- “आजू-बाजू जाला बूना, पकड़ चोटी, धर पछाड़ । लाओ हरफ का मुद्दा ।।”… Read More
सुख समृद्धि पाने का मन्त्र January 19, 2016 | aspundir | Leave a comment सुख समृद्धि पाने का मन्त्र मन्त्र:- “जे सकाम नर सुनहिं जे गावहिं । सुख सम्पत्ति नानाविध पावहिं ।।”… Read More
शत्रु को मित्र बनाने का मन्त्र January 19, 2016 | aspundir | Leave a comment शत्रु को मित्र बनाने का मन्त्र मन्त्र:- “गरल सुधा रिपु करहिं मिताई । गोपद सिन्धु अनल सितलाई ।।”… Read More
विष नाशक मन्त्र January 19, 2016 | aspundir | Leave a comment विष नाशक मन्त्र मन्त्र:- “नाम प्रताप जान सिब नीको । कालकूट फल दान अभी को ।।”… Read More
वृष्टि कारक व रोगनाशक मन्त्र January 19, 2016 | aspundir | Leave a comment वृष्टि कारक व रोगनाशक मन्त्र मन्त्र:- “सोइ जल अनल संघाता । होइ जलद जग जीवनदाता ।।”… Read More
अपराध क्षमापन का मन्त्र January 19, 2016 | aspundir | Leave a comment अपराध क्षमापन का मन्त्र मन्त्र:- “अनुचित बहुत कहेउँ अग्याता । छमहु छमा मंदिर दोउ भ्राता ।।”… Read More
श्रीहनुमत जंजीरा January 18, 2016 | aspundir | Leave a comment श्रीहनुमत जंजीरा (१) “ॐ गुरु जी । हनुमान पेलवान । बारे बरस का जुवान, हाथ में गदा – मुख में पान । ज्याँ समरूँ, त्याँ आगेवान । लुवे की पेटी – वज्र का ताला, पापी पाखण्डी का मुँह काला । जती सति का बोल – बाला, हमेरा पण्ड की रक्षा करो श्रीबजरङ्गवाला । सबद साचा,… Read More
गृह-रक्षा के लिए January 18, 2016 | aspundir | Leave a comment गृह-रक्षा के लिए मन्त्र :- “ॐ ह्रीं चण्डे ! चामुण्डे ! भ्रुकुटि-अट्टाट्टे ! भीम- दर्शने ! रक्ष रक्ष चौरेभ्य:, वज्रेभ्यः, अग्निभ्यः, श्वापदेभ्यः, दुष्ट-जनेभ्यः, सर्वेभ्यः:, सर्वोपद्रवेभ्यः, गण्डी:, ह्रीं ह्रीं ठः ठः ।”… Read More
भण्डार अक्षय करने के लिए January 18, 2016 | aspundir | Leave a comment भण्डार अक्षय करने के लिए मन्त्र :- “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ईश्वर – ध्यानम् । अन्नपूर्णायै नमः । ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ह्रीं ह्रीं हुङ्कली कुरु स्वामिनी जय विजय अप्रतिम-चके मम कर्षय सिद्धिं कुरु कुरु स्वाहा ।”… Read More