मूल सप्तशती October 12, 2015 | aspundir | Leave a comment ।। मूल सप्तशती ।। ।। ॐ श्रीदेव्युवाच ।। गर्ज गर्ज क्षणं मूढ ! मधु यावत् पिबाम्यहम् । मया त्वयि हतेऽत्रैव, गर्जिष्यन्त्याशु देवताः ।।१ व्रियतां त्रिदशाः सर्वे, यदस्मत्तोऽभिवाञ्छितम् ।।२ ।।ॐ ऋषिरुवाच ।।… Read More
राहुकाल दुर्गापूजा विधानम् October 12, 2015 | aspundir | Leave a comment राहुकाल दुर्गापूजा विधानम् राहुकाल की दक्षिण भारत में विशेष मान्यता है । राहुकाल में आसुरी शक्तियों का उदय होता है अतः अन्य शुभ कार्य नहीं किये जाते हैं । आसुरी शक्तिरयों के दमन हेतु व्यक्ति को जप पाठ एवं स्वाध्याय करना श्रेयस्कर होता है । राहुकाल में दुर्गा उपासना श्रेष्ठ फलदायिनी हैं । राहु का… Read More
मन्त्रात्मक सप्त-श्लोकी चण्डी October 12, 2015 | aspundir | Leave a comment मन्त्रात्मक सप्त-श्लोकी चण्डी (१) ‘ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि’ – प्रथम मन्त्र विनियोगः- ॐ अस्य ‘ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि’ इति सप्त-श्लोकी-चण्डी-प्रथम-मन्त्रस्य श्रीवशिष्ठ ऋषिः, श्रीआद्या-महा-काली देवता, स्त्रौं बीजं, कामाक्षा शक्तिः, श्रीत्रिपुर-सुन्दरी महा-विद्या, तमो गुणः, त्वक् ज्ञानेन्द्रियं, मोहो रसः, भगं कर्मेन्द्रियं, आश्चर्यं स्वरं, अग्निः तत्त्वं, अविद्या कला, स्त्रीं उत्कीलनं, योनिः मुद्रा मम क्षेम्-स्थैर्यायुरोग्याभि-वृद्धयर्थं श्रीजगदम्बा-योग-माया-भगवती-दुर्गा-प्रसाद-सिद्धयर्थं च नमो-युत-प्रणव-वाग्-वीज-स्व-वीज-लोम-विलोम-पुटितोक्त-सप्त-श्लोकी-चण्डी-प्रथम-मन्त्र-जपे विनियोगः ।… Read More
नवरात्र में करें शत्रु-शमन October 12, 2015 | aspundir | Leave a comment नवरात्र में करें शत्रु-शमन नवरात्रों में माँ दुर्गा की उपासना प्रायः सभी हिन्दुधर्मावलम्बी करते हैं, लेकिन उस उपासना को विशेष विधि के अनुसार किया जाए तो, उपासना के साथ-साथ मनोकामना की भी पूर्ति की जा सकती है। आधुनिक प्रतिस्पर्द्धी युग में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष शत्रु होना स्वाभाविक है। शत्रुओं के भय से मुक्ति तथा शत्रुओं से पीड़ित… Read More
दुर्गासहस्रनामस्तोत्रम् October 12, 2015 | aspundir | Leave a comment ।। दुर्गासहस्रनामस्तोत्रम् ।। ।। श्रीः ।। ।। श्री दुर्गायै नमः ।। ।। अथ श्री दुर्गासहस्रनामस्तोत्रम् ।। नारद उवाच – कुमार गुणगम्भीर देवसेनापते प्रभो । सर्वाभीष्टप्रदं पुंसां सर्वपापप्रणाशनम् ।। १।। गुह्याद्गुह्यतरं स्तोत्रं भक्तिवर्धकमञ्जसा । मङ्गलं ग्रहपीडादिशान्तिदं वक्तुमर्हसि ।। २।। स्कन्द उवाच – … Read More
श्रीकृष्ण ने जब अर्जुन के साथ किया युद्ध October 12, 2015 | aspundir | Leave a comment श्रीकृष्ण ने जब अर्जुन के साथ किया युद्ध एक बार महर्षि गालव जब प्रातः सूर्यार्घ्य प्रदान कर रहे थे, उनकी अञ्जलि में आकाशमार्ग से जाते हुए चित्रसेन की थूकी हुई पीक गिर पड़ी । मुनि को इससे बड़ा क्रोध हुआ । वे उसे शाप देना ही चाहते थे कि उन्हें अपने तपोनाश का ध्यान आ… Read More
सार्द्ध नव-चण्डी प्रयोग October 12, 2015 | aspundir | Leave a comment सार्द्ध नव-चण्डी प्रयोग कर्म-फल का इच्छुक प्राणी स्व-अभिलषित वस्तुओं की प्राप्ति के लिए अत्यधिक व्यग्र मन से प्रयत्न करता है। जीवन का बहुत बडा भाग व्यग्र मन से की गई साधना में व्यतीत हो जाता है। तथापि, सिद्धि एवं शान्ति नहीं मिल पाती और व्यक्ति सन्तप्त-चित्त ही संसार से चला जाता है। इसके कारणों पर… Read More
गौ-रक्षक अर्जुन नामावली October 12, 2015 | aspundir | Leave a comment गौ-रक्षक अर्जुन नामावली अर्जुनः फाल्गुनी जिष्णुः, किरीटी श्वेत-वाहनः । वीभत्सुर्विजयी पार्थः, सव्यसाची धनञ्जयः ।। कपि-ध्वजो गुडाकेशो, गाण्डीवो कृष्ण-सारथिः ।। एतान्यर्जुन-नामानि, गवां गोष्ठे च यो लिखेत् । न तत्र पशु-रोगादि, शुभं शीघ्रं प्रजायते ।।… Read More
देवीवाहन (सिंह) ध्यानम् October 12, 2015 | aspundir | 1 Comment ।। देवीवाहन (सिंह) ध्यानम् ।। ग्रीवायां मधू सूदनोऽस्य शिरसि श्री नीलकण्ठः स्थितः, श्री देवी गिरिजा ललाट फलके वक्षः स्थले शारदा । षड्वक्त्रो मणिबन्ध संधिषु तथा नागास्तु पार्श्वस्थिताः, कर्णौयस्य तु चाश्विनौ स भगवान-सिंहो ममास्त्विष्टदः ।।१… Read More
श्रीदुर्गा-सप्तशती पाठ विधि October 12, 2015 | aspundir | Leave a comment श्रीदुर्गा-सप्तशती पाठ विधि [^1] पूजनकर्ता स्नान करके, आसन शुद्धि की क्रिया सम्पन्न करके, शुद्ध आसन पर बैठ जाएँ, साथ में शुद्ध जल, पूजन सामग्री और श्री-दुर्गा-सप्तशती की पुस्तक । इन्हें अपने सामने काष्ठ आदि के शुद्ध आसन पर विराजमान कर दें। माथे पर अपनी पसंद के अनुसार भस्म, चंदन अथवा रोली लगा लें, शिखा बाँध… Read More