श्रीदुर्गा-अष्टोत्तर-शत-नाम-साधना October 16, 2015 | aspundir | Leave a comment श्रीदुर्गा-अष्टोत्तर-शत-नाम-साधना संकल्पः- ॐ तत्सत् अद्यैतस्य ब्रह्मणोऽह्नि-द्वितीय-प्रहरार्द्धे श्वेत-वराह-कल्पे जम्बू-द्वीपे भरत-खण्डे आर्यावर्त-देशे अमुक-पुण्य-क्षेत्रे-कलियुगे कलि-प्रथम-चरणे अमुक-सम्वत्सरे अमुक-मासे अमुक-पक्षे अमुक-तिथौ अमुक-वासरे अमुक-गोत्रो अमुक-(शर्मा, वर्मा, गुप्तो, दासो वा) अहं श्रीदुर्गा-प्रीत्यर्थं अष्टोत्तर-शत-नाम-मन्त्रैः यथा-शक्ति यजनं करिष्ये। विशेषः- अष्टोत्तर-शत-नामावली के नाम-मन्त्रों से पूजन करते समय विनियोग करना चाहिए। यदि नाम-मन्त्रों के द्वारा जप करना हो, तो ‘पूजने विनियोगः’ के स्थान पर ‘जपे विनियोगः’… Read More
श्रीदुर्गा-कवचेश्वरम् October 16, 2015 | aspundir | Leave a comment श्री दुर्गा कवचम् (रुद्रयामलोक्त) पाठान्तर के साथ ।। श्रीदुर्गा-कवचेश्वरम् ।। ।। पूर्व-पीठिका – श्रीभैरव उवाच ।। अधुना देवि ! वक्ष्येऽहं कवचं मन्त्र-गर्भकम् । दुर्गायाः सार-सर्वस्वं कवचेश्वरसञ्ज्ञकम् ।।१ परमार्थ-प्रदं नित्यं महा-पातक-नाशनम् । योगि-प्रियं योगी-गम्यं देवानामपि दुर्लभम् ।।२ विना दानेन मन्त्रस्य सिद्धिर्देवि ! कलौ भवेत् । धारणादस्य देवेशि शिवस्त्रैलोक्य-नायकः ।।३… Read More
श्री दुर्गा कवचम् (रुद्रयामलोक्त) October 16, 2015 | aspundir | Leave a comment श्री दुर्गा कवचम् (रुद्रयामलोक्त) ।।श्री भैरव उवाच।। अधुना देवि वक्ष्येऽहं कवचं मन्त्रगर्भकम् । दुर्गायाः सारसर्वस्वं कवचेश्वरसञ्ज्ञकम् ।।१ परमार्थप्रदं नित्यं महापातकनाशनम् । योगिप्रियं योगीगम्यं देवानामपि दुर्लभम् ।।२ विना दानेन मन्त्रस्य सिद्धिर्देवि कलौ भवेत् । धारणादस्य देवेशि शिवस्त्रैलोक्यनायकः ।।३… Read More
नवग्रह शाबर मन्त्र October 16, 2015 | aspundir | Leave a comment नवग्रह शाबर मन्त्र रविदेव हवन – हवन सामग्रीः- गौघृत तथा अर्क की लकड़ी । दिशाः- पूर्व, मुद्रा-हंसी, संख्याः- ९ बार या १०८ बार । मन्त्रः- “सत नमो आदेश । गुरुजी को आदेश । ॐ गुरुजी । सुन बा योग मूल कहे बारी बार । सतगुरु का सहज विचार ।। ॐ आदित्य खोजो आवागमन घट में… Read More
कार्य-सिद्धि कारक गोरक्षनाथ मंत्र October 16, 2015 | aspundir | Leave a comment कार्य-सिद्धि कारक गोरक्षनाथ मंत्र मन्त्रः- “ॐ गों गोरक्षनाथ महासिद्धः, सर्व-व्याधि विनाशकः । विस्फोटकं भयं प्राप्ते, रक्ष रक्ष महाबल ।। १।। यत्र त्वं तिष्ठते देव, लिखितोऽक्षर पंक्तिभिः । रोगास्तत्र प्रणश्यन्ति, वातपित्त कफोद्भवाः ।। २।। तत्र राजभयं नास्ति, यान्ति कर्णे जपाः क्षयम् । शाकिनी भूत वैताला, राक्षसा प्रभवन्ति न ।। ३।। नाऽकाले मरणं तस्य, न च सर्पेण… Read More
गृह बाधा शान्ति शाबर मन्त्र October 16, 2015 | aspundir | Leave a comment गृह बाधा शान्ति शाबर मन्त्र यह मंत्र जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में साधक की रक्षा करता है । कोई भी व्यक्ति इसे सिद्ध करके स्वयं को सुरक्षित कर सकता है । जिसने इसे सिद्ध कर लिया हो, ऐसा व्यक्ति कहीं भी जाए, उसको किसी प्रकार की शारीरिक हानि की आशंका नहीं रहेगी । केवल आततायी… Read More
कार्य-सिद्ध भैरव शाबर मन्त्र October 16, 2015 | aspundir | Leave a comment कार्य-सिद्ध भैरव शाबर मन्त्र मन्त्रः- “ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ-कार ! ॐ गुरु भु-मसान, ॐ गुरु सत्य गुरु, सत्य नाम काल भैरव कामरु जटा चार पहर खोले चोपटा, बैठे नगर में सुमरो तोय दृष्टि बाँध दे सबकी । मोय हनुमान बसे हथेली । भैरव बसे कपाल । नरसिंह जी की मोहिनी मोहे सकल… Read More
साधना सफलता का शाबर मन्त्र October 16, 2015 | aspundir | Leave a comment साधना सफलता का शाबर मन्त्र मन्त्रः- “ॐ इक ओंकार, सत नाम करता पुरुष निर्मै निर्वैर अकाल मूर्ति अजूनि सैभं गुर प्रसादि जप आदि सच, जुगादि सच है भी सच, नानक होसी भी सच – मन की जै जहाँ लागे अख, तहाँ-तहाँ सत नाम की रख । चिन्तामणि कल्पतरु आए कामधेनु को संग ले आए, आए… Read More
देवी-नैवेद्य October 14, 2015 | aspundir | Leave a comment चैत्रादि मासों, प्रतिपदादि-तिथियों एवं रवि-वारादि दिनों में देवी-नैवेद्य किस तिथि में, किस वार में, कौन-सा नैवेद्य लगाना चाहिए, इसका विवरण यहाँ दिया जा रहा है, जो ‘श्रीमद्-देवी-भागवत’ के आधार पर है। श्रद्धालु-जन इनके अनुसार यथा-सम्भव पूजन कर विशेष लाभ प्राप्त कर सकते हैं।… Read More
श्रीचण्डिका-हृदय-स्तोत्र October 14, 2015 | aspundir | Leave a comment श्रीचण्डिका-हृदय-स्तोत्र प्रस्तुत मन्त्रात्मक-श्रीचण्डिका-हृदय-स्तोत्र का सविधि तीनों सन्ध्याओं में पाठ करने से पाठ करने वाले व्यक्ति की सभी कामनाएँ पूर्ण होती है । प्रति सन्ध्या-काल में इस स्तोत्र का पाठ २१-२१ बार करना चाहिए । केवल पहले पाठ में विनियोग से ध्यान तक की प्रारम्भिक क्रिया और अन्तिम पाठ में फल-श्रुति का पाठ करना चाहिए ।… Read More