श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-15 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पंद्रहवाँ अध्याय हिमालय और मेना की तपस्या से प्रसन्न हो आद्यशक्ति का ‘पार्वती’ नाम से हिमालय के यहाँ प्रकट होना और उन्हें दिव्य विज्ञानयोग का उपदेश प्रदान करना (भगवती गीता का प्रारम्भ) अथ पञ्चदशोऽध्यायः श्रीपार्वतीहिमालयसंवादे विज्ञानयोगोपदेशवर्णनं नारदजी बोले — महादेव ! परमेश्वरी सती जिस प्रकार… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-14 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ चौदहवाँ अध्याय ब्रह्माजी का गङ्गा जी को कमण्डलु में लेकर स्वर्ग में आना है, माता से मिले बिना गङ्गा के स्वर्गलोक चले जाने पर क्रुद्ध मेना द्वारा उन्हें जलरूप होकर पुनः पृथ्वीलोक आने का शाप देना है, स्वर्गलोक में देवी गङ्गा से भगवान् शंकर का… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-13 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ तेरहवाँ अध्याय मेनका के गर्भ के अर्धांश से गङ्गा के प्राकट्य का आख्यान, देवर्षि नारद द्वारा हिमालय को गङ्गा का माहात्म्य सुनाना, ब्रह्मादि देवताओं द्वारा हिमालय से भगवती गङ्गा को ब्रह्मलोक ले जाने की याचना करना अथ त्रयोदशोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे गङ्गागमनं श्रीमहादेवजी बोले — वत्स !… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-12 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ बारहवाँ अध्याय शंकर जी का योनिपीठ कामरूप (कामाख्या) में जाकर तपस्या करना है, जगदम्बा द्वारा प्रकट होकर शीघ्र ही गङ्गा तथा हिमालय पुत्री पार्वती के रूप में आविर्भूत होने का उन्हें वर प्रदान करना है, भगवान् शंकर द्वारा इक्यावन शक्तिपीठों में प्रधान कामरूप पीठ के… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-11 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ ग्यारहवाँ अध्याय त्रिदेवों द्वारा जगदम्बिका की स्तुति करना, देवी का भगवान् शंकर को पार्वती रूप में पुनः प्राप्त होने का आश्वासन देना, छाया सती की देह लेकर शिव का प्रलयंकारी नृत्य करना, भगवान् विष्णु का सुदर्शन चक्र से सती के अङ्गों को काटना और उनसे… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-10 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ दसवाँ अध्याय सती के यज्ञकुण्ड में प्रवेश का समाचार सुनकर भगवान् शंकर का शोक से विह्वल होना, उनके तृतीय नेत्र की अग्नि से वीरभद्र का प्राकट्य, वीरभद्र द्वारा दक्ष का यज्ञ-विध्वंस कर उनका सिर काटना, ब्रह्माजी का भगवान् शंकर से यज्ञ पूर्ण करने की प्रार्थना… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-09 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ नवाँ अध्याय सती का पिता के घर पहुँचना, माता प्रसूति द्वारा सती का सत्कार करना तथा यज्ञ-विध्वंस के भयंकर स्वप्न को सुनाना, दक्ष द्वारा शिव की निन्दा । क्रुद्ध सती द्वारा छाया सती का प्रादुर्भाव और उसे यज्ञ नष्ट करने की आज्ञा देकर अन्तर्धान हो… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-08 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ आठवाँ अध्याय भगवान् शंकर द्वारा सती का दक्ष के घर जाने को अनुचित बताना, देवी सती के विराट रूप को देखकर शंकर का भयभीत होना, सती द्वारा काली, तारा आदि अपने दस स्वरूपों (दस महाविद्याओं) को प्रकट करना, देवी का यज्ञ-भूमि के लिए प्रस्थान अथ… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-07 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ सातवाँ अध्याय भगवती सती तथा भगवान् शिव का आनन्द विहार, दक्ष द्वारा यज्ञ करने और उसमें शंकर को न बुलाने का निश्चय करना, महर्षि दधीचि द्वारा दक्ष की निन्दा, नारद जी द्वारा सती को पिता के यज्ञ में जाने के लिए प्रेरित करना अथ सप्तमोऽध्यायः… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-06 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ छठा अध्याय सती के साथ भगवान् शिव का हिमालय पर्वत पर आना, सभी देवों का हिमालय पर विवाहोत्सव में पहुँचना, नन्दी द्वारा हिमालय पर आकर शिव की स्तुति करना और शंकर द्वारा उनको प्रमथाधिपतिपद प्रदान करना अथ षष्ठोऽध्यायः श्रीशिवनारदसंवादे नन्दिकेश्वरवर्णनं श्रीमहादेव जी बोले — हिमालय… Read More