अग्निपुराण – अध्याय 379 July 26, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 379 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ उन्यासीवाँ अध्याय भगवत्स्वरूप का वर्णन तथा ब्रह्मभाव की प्राप्ति का उपाय ब्रह्मज्ञान निरुपणं अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठजी! धर्मात्मा पुरुष यज्ञ के द्वारा देवताओं को, तपस्या द्वारा विराट् के पद को, कर्म के संन्यास द्वारा ब्रह्मपद को, वैराग्य… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 378 July 26, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 378 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ सतहत्तरवाँ अध्याय निदिध्यासनरूप ज्ञान ब्रह्मज्ञानम् अग्निदेव कहते हैं — ब्रहान् ! मैं पृथ्वी, जल और अग्नि से रहित स्वप्रकाशमय परब्रह्म हूँ। मैं वायु और आकाश से विलक्षण ज्योतिर्मय परब्रह्म हूँ। मैं कारण और कार्य से भिन्न ज्योतिर्मय परब्रह्म… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 377 July 26, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 377 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ सतहत्तरवाँ अध्याय श्रवण एवं मननरूप ज्ञान ब्रह्मज्ञानम् अग्निदेव कहते हैं — अब मैं संसाररूप अज्ञानजनित बन्धन से छुटकारा पाने के लिये ‘ब्रह्मज्ञान’ का वर्णन करता हूँ। ‘यह आत्मा परब्रह्म है और वह ब्रह्म में ही हूँ।’ ऐसा निश्चय… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 376 July 26, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 376 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ छिहत्तरवाँ अध्याय समाधि समाधिः अग्निदेव कहते हैं — जो चैतन्यस्वरूप से युक्त और प्रशान्त समुद्र की भाँति स्थिर हो, जिसमें आत्मा के सिवा अन्य किसी वस्तु की प्रतीति न होती हो, उस ध्यान को ‘समाधि’ कहते हैं। जो… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 375 July 25, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 375 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ पचहत्तरवाँ अध्याय धारणा धारणा अग्निदेव कहते हैं — मुने ! ध्येय वस्तु में जो मन की स्थिति होती है, उसे ‘धारणा’ कहते हैं। ध्यान की ही भाँति उसके भी दो भेद हैं — ‘साकार’ और ‘निराकार’। भगवान् के… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 374 July 25, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 374 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ चौहत्तरवाँ अध्याय ध्यान ध्यानम् अग्निदेव कहते हैं — मुने ! ‘ध्यै चिन्तायाम्’ — यह धातु है। अर्थात् ‘ध्यै’ धातु का प्रयोग चिन्तन के अर्थ में होता है। (‘ध्यै’ से ही ‘ध्यान’ शब्द की सिद्धि होती है) अतः स्थिरचित्त… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 373 July 25, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 373 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ तिहत्तरवाँ अध्याय आसन, प्राणायाम और प्रत्याहार का वर्णन आसनप्राणायामप्रत्याहाराः अग्निदेव कहते हैं — मुने। पद्मासन आदि नाना प्रकार के ‘आसन’ बताये गये हैं। उनमें से कोई भी आसन बाँधकर परमात्मा का चिन्तन करना चाहिये। पहले किसी पवित्र स्थान… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 372 July 25, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 372 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ बहत्तरवाँ अध्याय यम और नियमों की व्याख्या; प्रणव की महिमा तथा भगवत् पूजन का माहात्म्य यमनियमाः अग्निदेव कहते हैं — मुने। अब मैं ‘अष्टाङ्गयोग’ का वर्णन करूँगा, जो जगत् के त्रिविध ताप से छुटकारा दिलाने का साधन है।… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 371 July 25, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 371 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ इकहत्तरवाँ अध्याय प्राणियों की मृत्यु, नरक तथा पापमूलक जन्म का वर्णन नरकनिरूपणम् अग्निदेव कहते हैं — मुने! मैं यमराज के मार्ग की पहले चर्चा कर चुका हूँ, इस समय मनुष्यों की मृत्यु के विषय में कुछ निवेदन करूँगा… Read More
अग्निपुराण — अध्याय 370 July 24, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण — अध्याय 370 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ सत्तरवाँ अध्याय शरीर के अवयव शरीरावयवविभागवर्णनं अग्निदेव कहते हैं – वसिष्ठजी ! कान, त्वचा, नेत्र, जिह्वा और नासिका — ये ज्ञानेन्द्रियाँ हैं । आकाश सभी भूतों में व्यापक है । शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध – ये… Read More