अग्निपुराण — अध्याय 369 July 24, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण — अध्याय 369 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ उनहत्तरवाँ अध्याय आत्यन्तिक प्रलय एवं गर्भ की उत्पत्ति का वर्णन आत्यन्तिकलयगर्भोत्पत्तिनिरूपणम् अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठजी ! अब मैं ‘आत्यन्तिक प्रलय’ का वर्णन करूँगा । जब जगत् के आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक संतापों को जानकर मनुष्य को अपने… Read More
अग्निपुराण — अध्याय 368 July 24, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण — अध्याय 368 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ अड़सठवाँ अध्याय नित्य, नैमित्तिक और प्राकृत प्रलय का वर्णन नित्यनैमित्तिकप्राकृतप्रलयाः अग्निदेव कहते हैं — मुनिवर ! ‘प्रलय’ चार प्रकार का होता है — नित्य, नैमित्तिक, प्राकृत और आत्यन्तिक । जगत् में उत्पन्न हुए प्राणियों की जो सदा ही… Read More
अग्निपुराण — अध्याय 367 July 24, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण — अध्याय 367 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ सड़सठवाँ अध्याय सामान्य नाम—लिङ्ग सामान्यनामलिङ्गानि अग्निदेव कहते हैं — मुनिवर ! अब मैं सामान्यतः नामलिङ्गों का वर्णन करूँगा ( इस प्रकरण में आये हुए शब्द प्रायः ऐसे होंगे, जो अपने विशेष्य के अनुसार तीनों लिङ्गों में प्रयुक्त हो… Read More
अग्निपुराण — अध्याय 366 July 24, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण — अध्याय 366 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ छाछठवाँ अध्याय क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र-वर्ग क्षत्रविट्शूद्रवर्गाः अग्निदेव कहते हैं — मूर्धाभिषिक्त, राजन्य बाहुज, क्षत्रिय और विराट् — ये क्षत्रिय के वाचक हैं । जिस राजा के सामने सभी सामन्त— नरेश मस्तक झुकाते हैं, उसे अधीश्वर कहते हैं… Read More
अग्निपुराण — अध्याय 365 July 23, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण — अध्याय 365 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ पैंसठवाँ अध्याय ब्रह्म-वर्ग ब्रह्मवर्गः अग्निदेव कहते हैं — वंश, अन्ववाय, गोत्र, कुल, अभिजन और अन्वय— ये वंश के नाम हैं । मन्त्र की व्याख्या करने वाले ब्राह्मण को आचार्य कहते हैं । जिसने यज्ञ में व्रत की दीक्षा… Read More
अग्निपुराण — अध्याय 364 July 23, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण — अध्याय 364 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ चौसठवाँ अध्याय मनुष्य-वर्ग नृब्रह्मक्षत्रविट्शूद्रवर्गाः अग्निदेव कहते हैं — अब मैं नाम—निर्देशपूर्वक मनुष्यवर्ग, ब्राह्मण वर्ग, क्षत्रिय वर्ग, वैश्य वर्ग और शूद्रवर्ग का क्रमशः वर्णन करूँगा । ना, नर, पञ्चजन और मर्त्य — ये मनुष्य एवं पुरुष के वाचक हैं… Read More
अग्निपुराण — अध्याय 363 July 23, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण — अध्याय 363 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ तिरसठवाँ अध्याय भूमि, वनौषधि आदि वर्ग भूमिवनौषध्यादिवर्गाः अग्निदेव कहते हैं — अब मैं भूमि, पुर, पर्वत, वनौषधि तथा सिंह आदि वर्गों का वर्णन करूँगा । भू, अनन्ता, क्षमा, धात्री, क्ष्मा, कु तथा धरित्री — ये भूमि के नाम… Read More
अग्निपुराण — अध्याय 362 July 23, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण — अध्याय 362 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ बासठवाँ अध्याय नानार्थ-वर्ग नानार्थवर्गाः अग्निदेव कहते हैं — ‘नाक’ शब्द आकाश और स्वर्ग के अर्थ में तथा ‘लोक’ शब्द संसार, जन-समुदाय के अर्थ में आता है । ‘श्लोक’ शब्द अनुष्टुप् छन्द और सुयश अर्थ में तथा ‘सायक’ शब्द… Read More
अग्निपुराण — अध्याय 361 July 23, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण — अध्याय 361 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ एकसठवाँ अध्याय अव्यय—वर्ग अव्ययवर्गाः अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठजी ! ‘आङ्’ अव्यय ईषत् (स्वल्प), अभिव्याप्ति तथा मर्यादा (सीमा) अर्थ में प्रयुक्त होता है। साथ ही धातु से उसका संयोग होने पर जो विभिन्न अर्थ प्रकाशित होते हैं, उन… Read More
अग्निपुराण — अध्याय 360 July 22, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण — अध्याय 360 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ साठवाँ अध्याय स्वर्ग-पाताल आदि वर्ग स्वर्गपातालादिवर्गाः अग्निदेव कहते हैं — कात्यायन ! स्वर्ग आदि के नाम और लिङ्ग जिनके स्वरूप हैं, उन शुद्ध स्वरूप श्रीहरि का मैं वर्णन करता हूँ — स्वः [अव्यय ], स्वर्ग, नाक, त्रिदिव [… Read More