अग्निपुराण – अध्याय 073 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तिहत्तरवाँ अध्याय सूर्यदेव की पूजा-विधि का वर्णन सूर्यपूजाविधिः महादेवजी कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं करन्यास और अङ्गन्यासपूर्वक सूर्यदेवता के पूजन की विधि बताऊँगा। ‘मैं तेजोमय सूर्य हूँ’ — ऐसा चिन्तन करके अर्घ्य पूजन करे। लाल रंग के चन्दन… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 072 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ इकहत्तरवाँ अध्याय गणपतिपूजन की विधि गणेशपूजाविधिः भगवान् महेश्वर कहते हैं — स्कन्द ! अब मैं नित्य नैमित्तिक आदि स्नान, संध्या और प्रतिष्ठा सहित पूजा का वर्णन करूँगा। किसी तालाब या पोखरे से अस्त्रमन्त्र (फट्) के उच्चारणपूर्वक आठ अङ्गुल गहरी मिट्टी… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 071 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ इकहत्तरवाँ अध्याय गणपतिपूजन की विधि गणेशपूजाविधिः भगवान् महेश्वर ने कहा — कार्तिकेय ! मैं विघ्नों के विनाश के लिये गणपतिपूजा की विधि बतलाता हूँ, जो सम्पूर्ण अभीष्ट अर्थो को सिद्ध करनेवाली है। ‘गणंजयाय स्वाहा० ‘ – हृदय, ‘एकदंष्ट्राय हुं फट्’… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 070 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सत्तरवाँ अध्याय वृक्षों की प्रतिष्ठा की विधि वृक्षादि प्रतिष्ठाप्रकरणं श्रीभगवान् कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं वृक्षप्रतिष्ठा का वर्णन करता हूँ, जो भोग एवं मोक्ष प्रदान करने वाली है। वृक्षों को सर्वोषधिजल से लिप्त, सुगन्धित चूर्ण से विभूषित तथा… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 069 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ उनहत्तरवाँ अध्याय स्नपनोत्सव के विस्तार का वर्णन स्नानविधानं अग्निदेव कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं स्नपनोत्सव का विस्तारपूर्वक वर्णन करता हूँ। प्रासाद के सम्मुख मण्डप के नीचे मण्डल में कलशों का न्यास करे। प्रारम्भकाल में तथा सम्पूर्ण कर्मो को… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 068 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अड़सठवाँ अध्याय उत्सव – विधि का कथन यात्रोत्सवविधिकथनं श्रीभगवान् कहते हैं — अब मैं उत्सव की विधि का वर्णन करता हूँ। देवस्थापन होने के पश्चात् उसी वर्ष में एकरात्र, त्रिरात्र या अष्टरात्र उत्सव मनावे; क्योंकि उत्सव के बिना देवप्रतिष्ठा निष्फल… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 067 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सड़सठवाँ अध्याय जीर्णोद्धार–विधि जीर्णोद्धारविधानं श्रीभगवान् कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं जीर्णोद्धार की विधि बतलाता हूँ। आचार्य मूर्ति को विभूषित करके स्नान करावे। अत्यन्त जीर्ण, अङ्गहीन, भग्न तथा शिलामात्रावशिष्ट (विशेष चिह्न से रहित) प्रतिमा का परित्याग करे। उसके स्थान… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 066 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पैंसठवाँ अध्याय देवता सामान्य प्रतिष्ठा साधारणप्रतिष्ठाविधानं श्रीभगवान् कहते हैं — अब मैं देव समुदाय की प्रतिष्ठा का वर्णन करूँगा। यह भगवान् वासुदेव की प्रतिष्ठा की भाँति ही होती है। आदित्य, वसु, रुद्र, साध्य, विश्वेदेव, अश्विनीकुमार, ऋषि तथा अन्य देवगण-ये देवसमुदाय… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 065 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पैंसठवाँ अध्याय सभा-स्थापन और एकशालादि भवन के निर्माण आदि की विधि, गृहप्रवेश का क्रम तथा गोमाता से अभ्युदय के लिये प्रार्थना सभास्थापनकथनं श्रीभगवान् बोले — अब मैं सभा (देवमन्दिर) आदि की स्थापना का विषय बताऊँगा तथा इन सबकी प्रवृत्ति के… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 064 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ चौंसठवाँ अध्याय कुआँ, बावड़ी और पोखरे आदि की प्रतिष्ठा की विधि कूपादिप्रतिष्ठाकथनं श्रीभगवान् कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं कूप, वापी और तड़ाग की प्रतिष्ठा की विधि का वर्णन करता हूँ, उसे सुनो। भगवान् श्रीहरि ही जलरूप से देवश्रेष्ठ… Read More