श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-81 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-81 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ इक्यासीवाँ अध्याय कलियुग के मानवों का स्वभाव तथा भगवान् शंकर की उपासना और शिवनामसंकीर्तन की महिमा अथः एकाशीतितमोऽध्यायः श्रीवेदव्यासजैमिनिसंवादे श्रीमहादेवदेवर्षिनारदप्रश्नोत्तरकथनं श्रीमहादेवजी बोले — वत्स ! भगवान् शंकर की पूजा का माहात्म्य मुझसे भक्तिभाव तथा ध्यानपूर्वक संक्षेप में सुनिये ॥ १ ॥ कलियुग में सभी मानव… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-80 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-80 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अस्सीवाँ अध्याय रुद्राक्ष का माहात्म्य तथा उसके धारण का फल अथः अशीतितमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे रुद्राक्षमाहात्म्यवर्णनं श्रीमहादेवजी बोले — मुनिश्रेष्ठ ! अब मैं रुद्राक्ष की महिमा तथा उसके परम पवित्र और गोपनीय आख्यान का संक्षेप में वर्णन कर रहा हूँ, आप ध्यान से सुनिये ॥ १ ॥… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-79 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-79 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उन्यासीवाँ अध्याय तुलसी, बिल्व और आँवलावृक्षका माहात्म्य अथः ऊनाशीतितमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे तुलसीमाहात्म्यवर्णने आमलकबिल्वसंयोगकथनं श्रीनारदजी बोले — परमेश्वर ! महान् पातकों का नाश करने वाले योनिपीठतीर्थ का माहात्म्य आपके मुखकमल से मैंने सुना । ईश्वर ! आपने जो सर्वश्रेष्ठ, महापुण्यदायक बिल्वपत्र का माहात्म्य संक्षेप में वहाँ पर… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-78 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-78 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अठहत्तरवाँ अध्याय कामाख्यादेवी तथा सदाशिव भगवान् शंकर की उपासना का विशेष महत्त्व, बिल्वपत्र तथा बिल्ववृक्ष की महिमा एवं कामाख्यापीठ का माहात्म्य अथः अष्टसप्ततितमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे योनिपीठमाहात्म्यवर्णनं श्रीमहादेवजी बोले — वहाँ [ भगवती कामाख्या के शक्तिपीठ में] जो व्यक्ति वैशाख की तृतीया तिथि को भगवती चण्डिका की… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-77 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-77 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ सतहत्तरवाँ अध्याय कामरूपतीर्थ में प्रतिष्ठित दस महाविद्याओं का वर्णन तथा कामाख्या कवच अथः सप्तसप्ततितमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे श्रीमहाकामाख्याकवचवर्णनं श्रीनारदजी बोले — महेश्वर ! कामरूप महाक्षेत्र में दस महाविद्याओं की अधिष्ठात्री देवी महेश्वरी कौन हैं ? उनके विषय में हमें बताइये ॥ १ ॥ श्रीमहादेवजी बोले — मुनिश्रेष्ठ… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-76 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-76 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ छिहत्तरवाँ अध्याय कामरूपतीर्थ (कामाख्या शक्तिपीठ) के माहात्म्य का वर्णन अथः षट्सप्ततितमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे कामाख्यामाहात्म्यवर्णनं श्रीनारदजी बोले — प्रभो ! देव ! जगन्नाथ ! आपके मुखकमल से भगवती गङ्गा के अतुलनीय माहात्म्य को सुनकर मैं पवित्र हो गया हूँ, इसमें कोई संदेह नहीं है । पुनः आपसे… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-75 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-75 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पचहत्तरवाँ अध्याय गङ्गाजी का अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र तथा उसका माहात्म्य अथः पञ्चसप्ततितमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे श्रीगङ्गादेव्या अष्टोत्तरशतनामपूर्वकमाहात्म्यवर्णनं श्रीनारदजी बोले — परमेश्वर ! आपने बताया कि ‘गङ्गा’ नाम परम पुण्यदायी है । गङ्गा के और भी कितने श्रेष्ठ नाम हैं, उन्हें मुझे बताइये ॥ १ ॥ श्रीमहादेवजी बोले —… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-74 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-74 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ चौहत्तरवाँ अध्याय गङ्गामाहात्म्य-कथन के प्रसंग में धनाधिप वैश्य की कथा अथः चतुःसप्ततितमोऽध्यायः गङ्गामाहात्म्ये शृगालकवलितस्यारण्यमृतधनाधिपमांसस्य गङ्गाजलस्पर्शेन धनाधिपमुक्तिपदगमनं श्रीमहादेवजी बोले — मुनिश्रेष्ठ ! ज्ञानपूर्वक गङ्गा में देहत्याग करने वाला मनुष्य पाप से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त कर लेता है ॥ १ ॥ महापातकी मनुष्य अज्ञानतापूर्वक भी उसमें… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-73 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-73 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ तिहत्तरवाँ अध्याय गङ्गास्नान की महिमा, गङ्गा के समीप श्राद्ध, जप, दान तथा तर्पण का माहात्म्य और काशी की महिमा अथः त्रिसप्ततितमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे श्रीगङ्गामाहात्म्यकथनं श्रीमहादेवजी बोले — मुनिश्रेष्ठ ! ब्रह्महत्या करने वाला, गोवध करने वाला, सुरापान करने वाला तथा गुरुपत्नीगामी महापापी भी गङ्गा में स्नान कर… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-72 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-72 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ बहत्तरवाँ अध्याय गङ्गाजी के स्मरण, दर्शन और स्नान का माहात्म्य, गङ्गाजी की महिमा के संदर्भ में सर्वान्तक व्याध का आख्यान अथः द्विसप्ततितमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे श्रीगङ्गामाहात्म्यकथनं श्रीमहादेवजी बोले — ये पुण्यमयी गङ्गा अपना दर्शन करने तथा अपने जल का स्पर्श करने मात्र से प्राणियों के महापातकों का… Read More