ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 59 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) छप्पनवाँ अध्याय इन्द्र के दर्प-भङ्ग की कथा, नहुष की शची पर कुदृष्टि, शची का धर्म की बातें बताकर नहुष को समझाना और उसके न मानने पर बृहस्पतिजी की शरण में जाकर उनका स्तवन करना सूतजी कहते हैं — तदनन्तर नारदजी के पूछने… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 58 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) अठावनवाँ अध्याय पृथ्वी, सावित्री, गंगा, मनसा और राधा के दर्प का हरण नारायण बोले — एक बार पृथ्वी को भी अभियान हो गया कि ‘सबका आधार में ही हूँ भगवान् ने राजा पृथु द्वारा उसके अभिमान को चूर कर दिया । फिर… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 57 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) सतावनवाँ अध्याय लक्ष्मी का वैराग्य-त्याग नारायण बोले — हे नारद! देवों की स्तुति सुनकर सती लक्ष्मी ने रोना बन्द कर दिया और उनकी स्तुति से अति प्रसन्न होकर कहा । महालक्ष्मी बोलीं — हे देववृन्द ! मैं इस समय क्रोध या वैराग्य… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 56 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) छप्पनवाँ अध्याय लक्ष्मी स्तोत्र कथन नारद बोले — ब्रह्मन् ! मैं अनन्त एवं अच्युत का अपूर्व, रहस्यमय, परम अद्भुत एवं धन्य अनन्त चरित्र सुन चुका । भगवान् श्रीकृष्ण ने महाविष्णु ( महा विराट् ) एवं अन्य लोगों के दर्प को किस प्रकार… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 55 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) पचपनवाँ अध्याय श्रीकृष्ण की महत्ता एवं प्रभाव का वर्णन श्रीनारायण कहते हैं — नारद! वे ही भगवान् श्रीकृष्ण सर्वात्मा परम पुरुष हैं । वे दुराराध्य होते हुए भी अत्यन्त साध्य हैं अर्थात् आराधना के बल से उन्हें रिझा पाना अत्यन्त कठिन है… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 54 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ चौवनवाँ अध्याय श्रीकृष्ण के मथुरागमन से लेकर परम-धाम-गमन तक की लीलाओं का संक्षिप्त परिचय नारदजी ने पूछा — मुनिश्रेष्ठ ! इसके बाद कौन-सी रहस्य – लीला हुई ? भगवान् श्रीकृष्ण किस प्रकार नन्दभवन से मथुरा को गये ? श्रीहरि के वियोग से पीड़ित… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 53 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तिरपनवाँ अध्याय श्रीकृष्ण द्वारा श्रीराधा का शृङ्गार, गोपियों द्वारा उनकी सेवा नारदजी ने पूछा — पूर्णमासी बीत जाने पर जगदीश्वर श्रीकृष्ण ने क्या किया? उस समय उनकी कौन-सी रहस्यलीला हुई ? यह बताने की कृपा करें । श्रीनारायण ने कहा — रासमण्डल में… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 52 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ बावनवाँ अध्याय श्रीकृष्ण के अन्तर्धान होने से श्रीराधा और गोपियों का दुःख से रोदन, चन्दनवन में श्रीकृष्ण का उन्हें दर्शन देना, गोपियों के प्रणय- कोपजनित उद्गार, श्रीकृष्ण का उनके साथ विहार, श्रीराधा नाम के प्रथम उच्चारण का कारण श्रीकृष्ण ने कहा — प्रिये… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 51 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ इकावनवाँ अध्याय धन्वन्तरि के दर्प-भङ्ग की कथा, उनके द्वारा मनसादेवी का स्तवन भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — भगवान् धन्वन्तरि स्वयं महान् पुरुष हैं और साक्षात् नारायण के अंशस्वरूप हैं । पूर्वकाल में जब समुद्र का मन्थन हो रहा था, उस समय महासागर से… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 50 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पचासवाँ अध्याय दुर्वासा का दर्प-भंग श्रीकृष्ण बोले — प्रिये ! योगी, रुद्र के अंश से उत्पन्न, अत्यन्त तेजस्वी और महान् मुनि दुर्वासा का दर्पभङ्ग सुनो । एक बार राजा अम्बरीष ने द्वादशी व्रत करके अनेक ब्राह्मणों को भोजन कराने के पश्चात् स्वयं पारण… Read More