ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 49 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ उनचासवाँ अध्याय अग्नि के दर्प-भङ्ग की कथा श्रीकृष्ण कहते हैं — तदनन्तर सूर्यदेव ब्रह्माजी को प्रणाम करके प्रसन्न हुए और उनकी आज्ञा से अभिमान छोड़ प्रेमपूर्वक विनयपूर्ण बर्ताव करने लगे । अब अग्नि के मान-भञ्जन का उपाख्यान सुनो। यह उत्तम प्रसङ्ग पुराणों में… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 48 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ अड़तालीसवाँ अध्याय सूर्य के दर्प-भङ्ग की कथा राधिका बोलीं — भगवन्! आपने इन्द्र के दर्प-भङ्ग का प्रसङ्ग मुझसे कहा। अब मैं सूर्यदेव के गर्व-गञ्जन की बात यथार्थ-रूप से सुनना चाहती हूँ । भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — सुन्दरि ! सूर्य एक ही बार… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 47 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ सैंतालीसवाँ अध्याय इन्द्र के अभिमान-भङ्ग का प्रसङ्ग — प्रकृति और गुरु की अवहेलना से इन्द्र को शाप, गौतममुनि के शाप से इन्द्र के शरीर में सहस्त्र योनियों का प्राकट्य, अहल्या का उद्धार, विश्वरूप और वृत्र के वध से इन्द्र पर ब्रह्महत्या का आक्रमण,… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 46 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ छियालीसवाँ अध्याय पार्वती और शंकर का विलास राधिका बोलीं — प्रभो ! अतिचिरकाल से मृतक तथा शिव के द्वारा जीवित किये गये अपने प्रियतम (काम) को पुन: पाकर हर्षान्वित रति ने क्या किया ? । स्त्रियों को अपने पति से विच्छेद होना मरण… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 45 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पैंतालीसवाँ अध्याय शिव-पार्वती के विवाह का होम, स्त्रियों का नव-दम्पति को कौतुकागार में ले जाना, देवाङ्गनाओं का उनके साथ हास – विनोद, शिव के द्वारा कामदेव को जीवन- दान, वर-वधू और बारात की बिदाई, शिवधाम में पति-पत्नी की एकान्त वार्ता, कैलास में अतिथियों… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 44 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ चौंवालीसवाँ अध्याय पार्वती के विवाह की तैयारी, हिमवान् ‌के द्वार पर दूलह शिव के साथ बारात में विष्णु आदि देवताओं का आगमन, हिमालय द्वारा उनका सत्कार, वर को देखने के लिये स्त्रियों का आगमन, वर के अलौकिक रूप-सौन्दर्य को देख मेना का प्रसन्न… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 43 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तैंतालीसवाँ अध्याय शिव का सती के शव को लेकर शोकवश समस्त लोकों में भ्रमण, भगवान् विष्णु का उन्हें समझाना और प्रकृति की स्तुति के लिये कहना, शिव द्वारा की हुई स्तुति से संतुष्ट हुई प्रकृतिरूपिणी सती का शिव को दर्शन एवं सान्त्वना देना… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 42 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ बयालीसवाँ अध्याय अनरण्य की पुत्री पद्मा की धर्म द्वारा परीक्षा, सती पद्मा का उनको शाप देना तथा उस शाप से उनकी रक्षा की भी व्यवस्था करना, वसिष्ठजी का हिमवान्‌ को संक्षेप से सती के देह त्याग का प्रसङ्ग सुनाना वसिष्ठजी कहते हैं —… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 41 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ इकतालीसवाँ अध्याय ब्रह्माजी की आज्ञा से देवताओं का शिवजी से शैलराज के घर जाने का अनुरोध करना, शिव का ब्राह्मण-वेष में जाकर अपनी ही निन्दा करके शैलराज के मन में अश्रद्धा उत्पन्न करना, मेना का पुत्री को साथ ले कोप भवन में प्रवेश… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 40 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ चालीसवाँ अध्याय पार्वती की तपस्या, उनके तप के प्रभाव से अग्नि का शीतल होना, ब्राह्मण – बालक का रूप धारण करके आये हुए शिव के साथ उनकी बातचीत, पार्वती का घर को लौटना और माता-पिता आदि के द्वारा उनका सत्कार, भिक्षुवेषधारी शंकर का… Read More