ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 39 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ उनतालीसवाँ अध्याय गिरिराज हिमवान् द्वारा गणों सहित शिव का सत्कार, मेना को शिव के अलौकिक सौन्दर्य के दर्शन, पार्वती द्वारा शिव की परिक्रमा, शिव का उन्हें आशीर्वाद, शिवा द्वारा शिव का षोडशोपचार पूजन, शंकर द्वारा कामदेव का दहन तथा पार्वती को तपस्या द्वारा… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 38 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ अड़तीसवाँ अध्याय देवी सती और पार्वतीके गर्व-मोचन की कथा, सती का देहत्याग, पार्वती का जन्म, गर्ववश उनके द्वारा आकाशवाणी की अवहेलना, शंकरजी का आगमन, शैलराज द्वारा उनकी स्तुति तथा उस स्तुति की महिमा श्रीकृष्ण ने कहा —– देवि ! जगद्गुरु शंकर के दर्प-भङ्ग… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 37 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ सैंतीसवाँ अध्याय शंकर के निर्माल्य को शाप राधिका बोलीं — हे सन्देह निवारक ! ऐसे महात्मा विभु एवं सर्वेश्वर शिव का उच्छिष्ट क्यों नहीं प्रशस्त माना जाता । श्रीकृष्ण बोले — देवि !  इस विषय  में एक प्राचीन इतिहास बताऊंगा, जो पापरूपी ईंधनों… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 36 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ छत्तीसवाँ अध्याय भगवान् शिव के दर्पभङ्ग की कथा, वृकासुर से उनकी रक्षा, श्रीराधिका के पूछने पर श्रीकृष्ण के द्वारा शिव के तत्त्व-रहस्य का निरूपण भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — प्रिये ! ब्रह्माण्डों में जिन-जिन लोगों को अपनी शक्ति पर गर्व होता है, उनके… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 35 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पैंतीसवाँ अध्याय गङ्गा-स्नान से ब्रह्माजी को मिले हुए शाप की निवृत्ति, गोलोक में ब्रह्माजी को भारती की प्राप्ति, भारती सहित ब्रह्मा का अपने लोक में प्रवेश भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — प्रिये ! तदनन्तर सबने गङ्गा को देखकर मेरी माया मानी। उस समय… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 34 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ चौंतीसवाँ अध्याय गङ्गा की उत्पत्ति तथा महिमा श्रीकृष्ण कहते हैं — प्रिये ! इसी बीच में भगवान् शंकर वहाँ उपस्थित हुए । उनके मुख पर मुस्कराहट थी । वे सारे अङ्गों में विभूति लगाये वृषभराज नन्दिकेश्वर की पीठ पर बैठे थे । व्याघ्रचर्म… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 33 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तैंतीसवाँ अध्याय ब्रह्माजी का मोहिनी के शाप से अपूज्य होना, इस शाप के निवारण के लिये उनका वैकुण्ठधाम में जाना और वहाँ अन्यान्य ब्रह्माओं के दर्शन से उनके अभिमान का दूर होना श्रीकृष्ण बोले — बहुत समय तक मोहिनी का प्रयास चलता रहा;… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 32 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ बतीसवाँ अध्याय ब्रह्मा-मोहिनी संवाद, ब्रह्मा-कृत-श्रीकृष्ण स्तोत्र श्रीकृष्ण बोले — मोहिनी की स्तुति से कामदेव प्रसन्न हो गये । उसने स्वयं आकाश में स्थित होकर धनुष पर बाण चढ़ाया और उस महास्त्र को मन्त्रपूत करके पिता (ब्रह्मा) के ऊपर छोड़ दिया । काम के… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 31 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ इकतीसवाँ अध्याय ब्रह्माजी का राजा सुचन्द्र को वर देना, राजा का गोलोक जाना, ब्रह्माजी को देखकर मोहिनी का काम-मुग्ध होना, मोहिनी कृत कामदेव स्तोत्र तदनन्तर श्रीराधिका ने पूछा — श्यामसुन्दर ! ब्रह्माजी को क्यों और किससे शाप प्राप्त हुआ था ? श्रीकृष्ण बोले… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 30 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तीसवाँ अध्याय भगवान् श्रीकृष्ण द्वारा अष्टावक्र (देवल) – के शव का संस्कार तथा उनके गूढ़ चरित्र का परिचय नारदजी ने पूछा — ब्रह्मन् ! ( नारायणदेव ! ) उन महामुनि का कौन-सा अद्भुत रहस्य सुना गया ? मुनि अष्टावक्रके देह त्याग के पश्चात्… Read More