श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-037 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ सैंतीसवाँ अध्याय देवपत्नियों द्वारा की गयी गजाननस्तुति, गजानन से वर प्राप्तकर देवों को पुनः अपने पूर्ववत् स्वरूप की प्राप्ति, देवताओं द्वारा हेरम्ब गणपति की मूर्ति का शमीपत्रों द्वारा पूजन, ब्रह्माजी द्वारा मन्दारकाष्ठ से निर्मित गणेशप्रतिमा का शमीपत्रों द्वारा पूजन, मन्दार तथा शमी के माहात्म्य का वर्णन अथः सप्तत्रिंशोऽध्यायः बालचरिते शमीमन्दारमाहात्म्यं… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-036 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ छत्तीसवाँ अध्याय गजानन की पूजा किये बिना यज्ञारम्भ करने पर विघ्नस्वरूप देवी सावित्री का रुष्ट होना और उन देवों तथा मुनियों को जलरूप (नदीरूप) प्राप्त करने का शाप देना, पुनः ब्रह्माजी के कहने पर देवपत्नियों का शमीपत्र द्वारा गणेशजी का पूजन करना, प्रसन्न होकर गजानन का उन्हें दर्शन देना अथः… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-035 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ पैंतीसवाँ अध्याय महर्षि शौनक तथा ब्राह्मण औरव के समक्ष भगवान् गजानन का प्राकट्य और उन्हें शमी तथा मन्दार के माहात्म्य को बतलाना अथः पञ्चत्रिंशोऽध्यायः बालचरिते शमीमन्दारप्रशंसा ब्रह्माजी बोले — तदनन्तर उन दोनों ब्राह्मण औरव तथा महर्षि शौनक को दुखी देखकर हाथ में पाश धारण करने वाले, दस भुजा वाले भगवान्… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-034 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ चौंतीसवाँ अध्याय महर्षि भ्रूशुण्डी के शाप से ब्राह्मण औरव की पुत्री शमीका का शमीवृक्ष की तथा महर्षि शौनक के शिष्य धौम्यपुत्र मन्दार का मन्दारवृक्ष की योनि प्राप्त करने का आख्यान अथः चतुस्त्रिंशोऽध्यायः बालचरिते भ्रुशुण्डिशापवर्णनं कीर्ति बोली — हे ब्रह्मन् ! देवर्षि नारदजी और देवराज इन्द्र के बीच जो संवाद हुआ… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-033 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ तैंतीसवाँ अध्याय प्रियव्रत की पत्नी कीर्ति द्वारा शमीपत्रों से विनायक का पूजन, स्वप्न में कीर्ति को अनेक वरदानों की प्राप्ति, वरदान के प्रभाव से राजा प्रियव्रत का कीर्ति को धर्मपत्नी रूप में स्वीकार कर लेना, यथासमय कीर्ति को ‘क्षिप्रप्रसादन’ नामक पुत्र की प्राप्ति और सपत्नी द्वारा उसे विष देना, महर्षि… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-032 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ बत्तीसवाँ अध्याय गणेशाराधना में शमी का माहात्म्य, राजा प्रियव्रत का आख्यान, उनकी ज्येष्ठ पत्नी कीर्ति द्वारा गणेशजी की आराधना अथः द्वाविंशोऽध्यायः बालचरिते कीर्तिस्तवनं ब्रह्माजी बोले — हे ब्रह्मन् व्यासजी ! आप सावधान होकर उस प्राचीन इतिहास को सुनिये, जिसे स्वयं भगवान् गणेशजी ने प्रियव्रत से कहा था ॥ १ ॥… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-031 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ इकतीसवाँ अध्याय पिता कश्यपमुनि से वामन को गणेशाराधना का उपदेश प्राप्त होना, वामन द्वारा गणेश की आराधना, गणेश का प्रकट होकर वामन को दर्शन और अनेक वर देना, वामनभगवान् द्वारा बलि के यज्ञ में पधारना और तीन पग भूमि का दान प्राप्तकर अपने भक्त बलि को पाताल भेजना, वामन द्वारा… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-030 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ तीसवाँ अध्याय विष्णुभक्त राजा बलि का आख्यान, बलि के द्वारा सौवाँ अश्वमेधयज्ञ करने पर इन्द्र का चिन्तित होना तथा भगवान् विष्णु को अपनी चिन्ता निवेदित करना, भगवान् विष्णु द्वारा अदिति के गर्भ से वामनरूप में प्रकट होना अथः त्रिंशोऽध्यायः बालचरिते वामनावतारकथनं ब्रह्माजी बोले — बलि भगवान् विष्णु का भक्त था,… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-029 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ उनतीसवाँ अध्याय महर्षि कश्यप की पत्नी दिति तथा अदिति के वंश का वर्णन, हिरण्याक्ष तथा हिरण्यकशिपु की उत्पत्ति का वर्णन, उनकी तपस्या तथा उन्हें वरदान की प्राप्ति, प्रह्लादपुत्र विरोचन के वध का आख्यान अथः एकोनत्रिंशोऽध्यायः बालचरिते विरोचनवध ब्रह्माजी बोले — मैंने कश्यप को आज्ञा दी थी कि आप विविध प्रकार… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-028 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ अट्ठाईसवाँ अध्याय राजा साम्ब तथा दुष्टबुद्धि के जन्म-जन्मान्तरों की कथा, उनके द्वारा अनजान में किये गये शमीपत्र के पूजन से गजानन का प्रसन्न होकर उन्हें दिव्य देह प्राप्त कराकर स्वर्गलोक प्राप्त कराना अथः अष्टाविंशतितमोऽध्यायः बालचरिते भीमराक्षसयोर्जन्मवर्णनं ब्रह्माजी बोले — राजा साम्ब का वह दुष्टबुद्धि नामक अमात्य राज्य का कार्य करता… Read More