श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-057 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ सत्तावनवाँ अध्याय काशिराज की पराजय और नरान्तक का उन्हें बन्दी बना लेना अथः सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्यायः राजनिग्रहं ब्रह्माजी बोले — जब उस दैत्यराज ने युद्धहेतु प्रयाण किया तो प्राग्गुल्मों (राज्य की सीमावर्ती चौकियों)-में स्थित लोग भागकर राजा के समीप आये और भोजन करते हुए राजा से कहने लगे कि चतुरंगिणी सेना के… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-056 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ छप्पनवाँ अध्याय नरान्तक का काशीपुरी पर आक्रमण करने के लिये प्रस्थान अथः षट्पञ्चाशत्तमोऽध्यायः नरान्तकनिर्गमनं ब्रह्माजी बोले — तदुपरान्त वे दोनों दूत रौद्रपुर नामक नगर में स्थित नरान्तक के सभाभवन में जा पहुँचे । वह मनोहर सभाभवन मणि-मुक्ता आदि से विभूषित और हजारों स्तम्भों से शोभायमान था । उसकी लम्बाई-चौड़ाई सौ-सौ… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-055 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ पचपनवाँ अध्याय भगवान् विनायक का अपने भक्त ब्राह्मण शुक्ल को सर्ववैभवसम्पन्न भवन प्रदान करना अथः पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्यायः दूतमोचनं ब्रह्माजी बोले — उन ( सनक और सनन्दन) – के चले जाने के अनन्तर जब काशिराज ने विनायक को नहीं देखा तो उन नृपश्रेष्ठ को बड़ा मोह हुआ। [ उसी दशा में ]… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-054 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ चौवनवाँ अध्याय काशी में ‘वरदविनायक’ की स्थापना अथः चतुःपञ्चाशत्तमोऽध्यायः बालचरिते सनकसनन्दनस्तुतिवर्णनं ब्रह्माजी बोले — [ एक दिन विनायकदेव भक्ति के वंशीभूत होकर धनहीन शुक्ल के घर जा पहुँचे और ] उन बालरूप गणपति ने शुक्ल के यहाँ भोजन किया, तदुपरान्त वहीं प्रांगण में खेलते-खेलते क्षणभर में सो गये। इधर [बहुत-से]… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-053 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ तिरपनवाँ अध्याय काशिराज का गणपतिधाम में भगवान् विनायक का दर्शन करना और उनकी स्तुति करना अथः त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्यायः काशिराजस्य स्वानन्दप्राप्तिवर्णनं ब्रह्माजी बोले — उन लोगों ने पुण्यराशि के कारण मिलने वाले उस इक्षुसागर के रस का भलीभाँति पान किया । इक्षुसाग रके मध्य में एक निर्मल पुष्करिणी थी, जिसमें सूर्य के… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-052 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ बावनवाँ अध्याय काशिराज का विभिन्न लोकों का दर्शन करते हुए गणपतिधाम में पहुँचना अथः द्विपञ्चाशत्तमोऽध्यायः स्वानन्दभुवनप्राप्तिवर्णनं दूत बोले — हे नृपश्रेष्ठ ! यह लोक भूत, प्रेत, पिशाच [आदि पापयोनियों ] -का [ निवास-स्थल ] है । हे भूपते ! जो लोग निन्दा, चुगलखोरी, तस्करी आदि पाप करते हैं, वे यहाँ… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-051 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ इक्यावनवाँ अध्याय काशिराज के गणपतिधामगमन का वर्णन अथः एकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः स्वानन्दभुवननामपंस्थानं व्यासजी ने पूछा — हे भगवन् ! यह मुझे बताइये कि काशिराज ने किस रीति से विघ्नराज गणेश की आराधना की और कैसे उन्होंने चर्मदेह ( पार्थिव शरीर ) – से [गणपति के] परमोत्तम धाम को प्राप्त किया ? [गणपति… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-050 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ पचासवाँ अध्याय महर्षि मुद्गल द्वारा काशिराज को विनायक के लोक ‘स्वानन्दभुवन’ का परिचय बना सदैव वहाँ विद्यमान रहने वाले विनायक के स्वरूप का निरूपण करना, मुद्गलजी के उपदेश से काशिराज द्वारा गणेशोपासना और अन्त में विनायक – लोक को प्राप्त करना अथः पञ्चाशत्तमोऽध्यायः गणेशलोकवर्णनं व्यासमुनि बोले — [हे ब्रह्मन्!] काशिराज… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-049 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ उनचासवाँ अध्याय कीर्ति के पुत्र का राज्याभिषेक, ब्रह्माजी द्वारा विनायकलोक का तथा उसकी महिमा का वर्णन, विनायक के भक्तों को विनायकलोक की प्राप्ति अथः एकोनपञ्चाशत्तमोऽध्यायः शमीमन्दारफलवर्णनं ब्रह्माजी बोले — दुण्ढिविनायक से इस प्रकार वरदान प्राप्त की हुई कीर्ति ने शेष रात्रि व्यतीत करके उषाकाल में स्नान किया और वह उन… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-048 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ अड़तालीसवाँ अध्याय ढुण्ढिराज का शिव को काशी में आने के लिये सन्देश भेजना, भगवान् शिव का काशी में आकर दुण्ढिराज की स्तुति करना तथा ढुण्डिराज की महिमा का प्रतिपादन करना, रानी कीर्ति का काशी आकर दुण्ढिराज की भक्ति करना, ढुण्डिराज का प्रत्यक्ष दर्शन देकर उसे तथा उसके पुत्र को अनेक… Read More