श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-067 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ सड़सठवाँ अध्याय विनायक और देवान्तक का युद्ध अथः सप्तषष्टितमोऽध्यायः अस्त्रयुद्धं ब्रह्माजी कहते हैं — उस सम्पूर्ण वृत्तान्त को जानकर विनायक अपने मन में महान् आश्चर्य करने लगे। तब वे क्रोधित तथा युद्ध के लिये उद्यत होकर सिंह पर सवार हुए। तदनन्तर उन्होंने अपने गर्जन से आकाश और दिशाओं को ध्वनित… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-066 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ छाछठवाँ अध्याय देवान्तक का अघोरमन्त्र से हवनकर दिव्य अश्व पाना और उस पर आरूढ़ हो रणक्षेत्र में जाना तथा सिद्धियों की सम्पूर्ण सेना का संहार कर डालना अथः षट्षष्टितमोऽध्यायः सिद्धिपराजय ब्रह्माजी कहते हैं — शारदा और रौद्रकेतु ने अपने पुत्र देवान्तक को रात में अकेले [लौटा हुआ] देखकर उसका आलिंगनकर… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-065 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ पैंसठवाँ अध्याय विनायक का बुद्धि को युद्ध के लिये भेजना, बुद्धि द्वारा एक भयंकर शक्ति का प्राकट्य और उस शक्ति द्वारा देवान्तक की सेना का संहार अथः पञ्चषष्टितमोऽध्यायः बुद्धिविजयं ब्रह्माजी कहते हैं — बुद्धिद्वारा कहे गये वचन को सुनकर भगवान् विनायक हर्षित होकर उससे बोले — भगवान् [ विनायक ]… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-064 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ चौंसठवाँ अध्याय देवान्तक से युद्ध में सिद्धिसेना की पराजय अथः चतुःषष्टितमोऽध्यायः बालचरितेऽष्टसिद्धिपराजय ब्रह्माजी कहते हैं — [ हे मुने!] कालान्तक दैत्य और प्राकाम्य का परस्पर युद्ध हो रहा था और जब कालान्तक प्राकाम्य पर विजय पाने ही वाला था, तभी वशित्व ने वेगपूर्वक वहाँ पहुँचकर प्राकाम्य की सहायता की और… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-063 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ तिरसठवाँ अध्याय अणिमादि सिद्धियों की सेना का देवान्तक की सेना से युद्ध अथः त्रिषष्टितमोऽध्यायः बालचरिते शुक्रत्यागं दूतों ने कहा — हे राजन् ! काल को भी भयभीत कर देने वाले तथा नभःस्पर्शी मस्तक वाले अनेक प्रकार के असंख्य भयंकर दैत्यों से घिरे हुए महाभयंकर दैत्य देवान्तक ने आपकी नगरी को… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-062 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ बासठवाँ अध्याय नरान्तक के सिर को लेकर उसके माता-पिता का देवान्तक के पास जाना और देवान्तक का काशिराज की नगरी पर आक्रमण करना अथः द्विषष्टितमोऽध्यायः नगरीनिरोधं ब्रह्माजी बोले — रौद्रकेतु विप्र की भार्या, जिसका नाम शारदा था, वह अपनी सखियों के साथ कौतूहलपूर्वक वितर्दी (आँगन में बने चबूतरे)- ) –… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-061 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ इकसठवाँ अध्याय भगवान् विनायक द्वारा नरान्तक का वध अथः एकषष्टित्तमोऽध्यायः दैत्यदमनं विराङ्दर्शनं विनायक बोले — [अहो दैत्य ! ] मैंने इससे पहले इतना बलवान् योद्धा नहीं देखा, तुम तो परम पराक्रमी हो। इस समय मुझ बालक के पराक्रमपूर्ण युद्ध व्यापार का अवलोकन करो ॥ १ ॥ ऐसा कहकर उन्होंने तरकस… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-060 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ साठवाँ अध्याय भगवान् विनायक और नरान्तक का युद्ध अथः षष्टितमोऽध्यायः श्रीगणेशनरान्तकयुद्धवर्णनं ब्रह्माजी बोले — तदुपरान्त (कालपुरुष के द्वारा पकड़े जाने पर) विनायक के [पराक्रमपूर्ण] क्रिया-कलाप देखकर नरान्तक बुद्धि से सोचने लगा कि मैंने [आज] इसका अद्भुत तेज देख लिया है ॥ १ ॥ जब काशिराज पकड़े गये तो इसने कालपुरुष… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-059 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ उनसठवाँ अध्याय काशिराज की नरान्तक से मुक्ति अथः एकोनषष्टितमोऽध्यायः राजमोक्षणं मुनि बोले — बालरूपधारी विनायक ने उस पुरुष को कैसे उत्पन्न किया था, जिसने नरान्तक की सेना का भक्षण किया और जो नरान्तक को [विनायक के समीप] ले आया था। यह बात मुझे स्पष्ट रूप से बतलाइये, इस विषय में… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-058 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ अट्ठावनवाँ अध्याय काशिराज की पत्नी का विलाप करना और विनायक की सिद्धि नामक शक्ति का विशाल सेना और क्रूर नामक कालपुरुष को प्रकट करना, कालपुरुष द्वारा नरान्तक सेना का भक्षणकर उसे विनायक के पास ले आना अथः अष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः नरान्तकनिग्रहं ब्रह्माजी बोले — इधर नरान्तक हर्षपूर्वक आधा ही मार्ग तय कर… Read More