भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६९ से १७० December 18, 2018 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६९ से १७० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६९ से १७० भगवान् सूर्य के निमित्त गृह एवं रथ आदि के दान का माहात्म्य सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! अपने वित्त के अनुसार मिट्टी, लकड़ी, पत्थर तथा पके हुए ईंटों से… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६८ December 18, 2018 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६८ कामप्रद स्त्री-व्रतका वर्णन सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! जो स्त्री कार्तिक मास के दोनों पक्षों की षष्ठी एवं सप्तमी तिथियों में क्षमा, अहिंसा आदि नियमों का पालन कर, संयतेन्द्रिय होती हुई एकभुक्त रहती… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६६ से १६७ December 18, 2018 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६६ से १६७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६६ से १६७ निक्षुभार्क-सप्तमी तथा निक्षुभार्क-चतुष्टय-व्रत-माहात्म्य-वर्णन सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! जो स्त्री उत्तम पुत्र की आकाङ्क्षा रखती है, उसे ‘निक्षुभार्क’ नाम का व्रत करना चाहिये । यह व्रत स्त्री एवं पुरुष… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६५ December 18, 2018 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६५ उभयसप्तमी-व्रत का वर्णन सुमन्तु मुनिने कहा — राजन् ! अब मैं आपको धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष इस चतुर्वर्ग की प्राप्ति करानेवाले भगवान् सूर्य के उत्तम व्रत को बतलाता हूँ । पौष मास के उभयपक्ष… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६४ December 18, 2018 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६४ सूर्यषष्ठी-व्रत की महिमा सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! अब आप भगवान् सूर्य को अत्यन्त प्रिय सूर्यषष्ठी व्रत के विषयमें सुनें । सूर्यषष्ठी-व्रत करनेवाले को जितेन्द्रिय एवं क्रोधरहित होकर अयाचित-व्रत का पालन करते हुए… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६३ December 18, 2018 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६३ विभिन्न पुष्पों द्वारा सूर्य-पूजन का फल सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! अमित तेजस्वी भगवान् सूर्य को स्नान कराते समय ‘जय’ आदि माङ्गलिक शब्दों का उच्चारण करना चाहिये तथा शङ्ख, भेरी आदि के द्वारा… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६१ से १६२ December 18, 2018 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६१ से १६२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६१ से १६२ सूर्योपासनाका फल शतानीक ने पूछा — मुने ! आपने भगवान् सूर्य के विषय में जो कहा, वह सत्य ही है, संसार के मूल कारण तथा परम दैवत भगवान् सूर्य ही… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६० December 18, 2018 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६० ब्रह्मादि देवताओं द्वारा सूर्यके विराट्-रूप का दर्शन महाराज शतानीक ने कहा — मुने ! आपने भगवान् सूर्य के अद्भुत चरित्र का वर्णन किया है, जिनका पूजन ब्रह्मा आदि देवता प्रतिदिन विधिपूर्वक करते रहते हैं… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १५७ से १५९ December 18, 2018 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १५७ से १५९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १५७ से १५९ सौर-धर्म-निरूपण में सूर्यावतार का कथन शतानीक ने पूछा — ब्रह्मन् ! जिन तेजस्वी भगवान् सूर्यनारायण ने ब्रह्माजी को वर प्रदान किया, देवताओं और पृथ्वी को उत्पन्न किया, जो ब्रह्मादि देवताओं… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १५२ से १५६ December 18, 2018 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १५२ से १५६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १५२ से १५६ ब्रह्मादि देवताओंद्वारा भगवान् सूर्यकी स्तुति एवं वर-प्राप्ति सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! भगवान् सूर्य की भक्ति, पूजा और उनके लिये दान करना तथा हवन करना सबके वश की बात… Read More