भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १८७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १८७ श्रद्धा की महिमा, खखोल्क-मन्त्र का माहात्म्य तथा गौ की महिमा अरुणने पूछा — भगवन् आदित्यदेव ! मनुष्य किस पुण्यकर्म का सम्पादन कर स्वर्ग जाते हैं ? कर्मयज्ञ, तपोयज्ञ, स्वाध्याययज्ञ, ध्यानयज्ञ और ज्ञानयज्ञ— इन पाँच… Read More


भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १८६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १८६ सौर-धर्म में शुद्धि-प्रकरण भगवान् भास्कर ने कहा — खगाधिप ! ब्राह्मणों को नित्य पवित्र तथा मधुरभाषी होना चाहिये, उन्हें प्रतिदिन स्नानादि से पवित्र हो चन्दनादि सुगन्धित द्रव्यों को धारणकर देवताओं का पूजन आदि करना… Read More


भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १८५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १८५ मातृ-श्राद्ध की संक्षिप्त विधि भगवान् आदित्य ने कहा — अरुण ! रात्रि में श्राद्ध नहीं करना चाहिये । रात्रि में किया गया श्राद्ध राक्षसी श्राद्ध कहा जाता है । दोनों संध्याओं में और सूर्य… Read More


भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १८३ से १८४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १८३ से १८४ श्राद्ध के विविध भेद तथा वैश्वदेव-कर्म की महिमा भगवान् सूर्य ने अनूरु (अरुण) — से कहा — अरुण ! द्विजमात्र को विधिपूर्वक पञ्च-महायज्ञ— भूतयज्ञ, पितृयज्ञ, ब्रह्मयज्ञ, दैवयज्ञ और मनुष्ययज्ञ करना… Read More


भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १८१ से १८२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १८१ से १८२ विविध स्मृति-धर्मों तथा संस्कारों का वर्णन राजा शतानीक ने कहा — ब्रह्मन् ! पाँच प्रकार के जो स्मृति आदि धर्म हैं, उन्हें जानने की मुझे बड़ी ही अभिलाषा है ।… Read More


भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १७५ से १८० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १७५ से १८० सौर-धर्म में शान्तिक कर्म एवं अभिषेक-विधि गरुड़जी ने पूछा— अरुण ! जो आधि-व्याधि से पीड़ित एवं रोगी, दुष्ट ग्रह तथा शत्रु आदि से उत्पीडित और विनायक से गृहीत है, उन्हें… Read More


भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १७३ से १७४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १७३ से १७४ सौर-धर्म की महिमा का वर्णन, ब्रह्माकृत सूर्य-स्तुति राजा शतानीक ने कहा — ब्राह्मणश्रेष्ठ ! आप सौरधर्म को पुनः विस्तार से वर्णन कीजिये । सुमन्तु मुनि बोले — महाबाहो ! तुम… Read More


भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १७१ से १७२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १७१ से १७२ सौरधर्म में सदाचरण का वर्णन सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! अब मैं सौरधर्म से सम्बद्ध सदाचारों का संक्षेप में वर्णन करता हूँ । सूर्य-उपासक को भूखे-प्यासे, दीन-दुःखी, थके हुए,… Read More


वरुणसूक्त ऋषि — शुनःशेप, आजीगर्ति एवं वशिष्ठ, निवास स्थान —- द्युस्थानीय, ऋग्वेद संहिता, प्रथम मंडल सूक्त 25 ऋग्वेदके प्रथम मण्डल का पचीसवाँ सूक्त वरुणसूक्त कहलाता है । इस सूक्त में शुनःशे पके द्वारा वरुणदेवता की स्तुति की गयी है । शुनःशेप की कथा वेदों, ब्राह्मणग्रन्थों तथा पुराणों में विस्तार से आयी है । कथासार यह… Read More


सूर्य सूक्त (क) इस ऋग्वेदीय ‘सूर्य सूक्त ‘ ( १ / ११५ )— के ऋषि ‘कुत्स आङ्गिरस’ हैं, देवता सूर्य हैं और छन्द त्रिष्टुप् है । इस सूक्त के देवता सूर्य सम्पूर्ण विश्व के प्रकाशक ज्योतिर्मय नेत्र हैं, जगत् की आत्मा हैं और प्राणि-मात्र को सत्कर्मों में प्रेरित करनेवाले देव हैं, देवमण्डल में इनका अन्यतम… Read More