शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 02 शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 02 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः दूसरा अध्याय शिवपुराण का माहात्म्य एवं परिचय सूतजी बोले — हे साधु-महात्माओ ! आप सबने तीनों लोकों का हित करनेवाली अच्छी बात पूछी है । मैं गुरुदेव व्यासजी का स्मरण करके आप लोगों के स्नेहवश इस विषय का वर्णन करूँगा, आपलोग आदरपूर्वक… Read More
शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 01 शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 01 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पहला अध्याय प्रयाग में सूतजी से मुनियों का शीघ्र पापनाश करनेवाले साधन के विषय में प्रश्न आद्यन्तमङ्गलमजातसमानभावमार्यं तमीशमजरामरमात्मदेवम्। पञ्चाननं प्रबलपञ्चविनोदशीलं सम्भावये मनसि शङ्करमम्बिकेशम्॥ जो आदि और अन्त में [तथा मध्य में भी] नित्य मङ्गलमय हैं, जिनकी समानता अथवा तुलना कहीं भी नहीं… Read More
शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 07 शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 07 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सातवाँ अध्याय श्रोताओं के पालन करने योग्य नियमों का वर्णन ॥ शौनक उवाच ॥ सूत सूत महाप्राज्ञ धन्यस्त्वं शैवपुङ्गव । श्रावितेयं कथाऽस्माकमद्भुता च शुभावहा ॥ १ ॥ पुंसां शिवपुराणस्य श्रवणव्रतिनां मुने । सर्वलोकहितार्थाय दयया नियमं वद ॥ २ ॥… Read More
शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 06 शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 06 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः छठा अध्याय शिवपुराण के श्रवण की विधि शिवपुराणश्रवणविधिः ॥ शौनक उवाच ॥ सूत सूत महाप्राज्ञ व्यासशिष्य नमोऽस्तु ते । धन्यस्त्वं शैववर्योऽसि वर्णनीयमहद्गुणः ॥ १ ॥ श्रीमच्छिवपुराणस्य श्रवणस्य विधिं वद । येन सर्वं लभेच्छ्रोता सम्पूर्णं फलमुत्तमम् ॥ २ ॥… Read More
शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 05 शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 05 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पाँचवाँ अध्याय चंचुला के प्रयत्न से पार्वतीजी की आज्ञा पाकर तुम्बुरु का विन्ध्यपर्वत पर शिवपुराण की कथा सुनाकर बिन्दुग का पिशाचयोनि से उद्धार करना तथा उन दोनों दम्पती का शिवधाम में सुखी होना बिन्दुगसद्गतिः ॥ शौनक उवाच ॥ सूत सूत महाभाग धन्यस्त्वं शिवसक्तधीः ।… Read More
शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 04 शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 04 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौथा अध्याय चंचुला की प्रार्थना से ब्राह्मण का उसे पूरा शिवपुराण सुनाना और समयानुसार शरीर छोड़कर शिवलोक में जा चंचुला का पार्वतीजी की सखी होना चंचुलायाः सद्गतिः ॥ ब्राह्मण उवाच ॥… Read More
शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 03 शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 03 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तीसरा अध्याय चंचुला का पाप से भय एवं संसार से वैराग्य चंचुलावैराग्यवर्णनम् ॥ शौनक उवाच ॥ सूत सूत महाभाग सर्वज्ञोऽसि महामते । त्वत्प्रसादात्कृतार्थोऽहं कृतार्थोऽहं पुनः पुनः ॥ १ ॥ इतिहासमिमं श्रुत्वा मनो मेऽतीव मोदते । अन्यामपि कथां शम्भोर्वद प्रेमविवर्द्धिनीम् ॥ २ ॥ नामृतम्पिबतां लोके… Read More
शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 02 शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 02 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः दूसरा अध्याय शिवपुराण के श्रवण से देवराज को शिवलोक की प्राप्ति ॥ शौनक उवाच ॥ सूत सूत महाभाग धन्यस्त्वं परमार्थवित् । अद्भुतेयं कथा दिव्या श्राविता कृपया हि नः ॥ १ ॥ अघौघविध्वंसकरी मनःशुद्धिविधायिनी । शिवसन्तोषजननी कथेय नः श्रुताऽद्भुता ॥ २ ॥ एतत्कथासमानं न भुवि… Read More
शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 01 शिवमहापुराण माहात्म्य – अध्याय 01 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पहला अध्याय शौनकजी के साधनविषयक प्रश्न करने पर सूतजी का उन्हें शिवमहापुराण की महिमा सुनाना ॥ श्रीशौनक उवाच ॥ हे हे सूत महाप्राज्ञ सर्वसिद्धान्तवित्प्रभो । आख्याहि मे कथासारं पुराणानां विशेषतः ॥ १ ॥ सदाचारश्च सद्भक्तिर्विवेको वर्द्धते कथम् । स्वविकारनिरासश्च सज्जनैः क्रियते कथम् ॥ २… Read More
श्रीमद्भागवतकी आरती ॥ श्रीहरिः ॥ ॥ श्रीमद्भागवतकी आरती ॥ आरति अतिपावन पुरान की । धर्म-भक्ति-विज्ञान-खान की ॥ आरति अतिपावन पुरान की ॥ महापुरान भागवत निरमल । शुक-मुख-विगलित निगम-कल्प-फल । परमानन्द-सुधा-रसमय कल । लीला-रति-रस रस-निधान की ॥ आरति अतिपावन पुरान की ॥ कलि-मल-मथनि त्रिताप-निवारिनि । जन्म-मृत्युमय भव-भय-हारिनि । सेवत सतत सकल सुखकारिनि । सुमहौषधि हरि-चरित-गान की ॥ आरति… Read More