॥ मंत्रात्मक गायत्री कवच ॥ देव देव महादेव! संसारार्णव तारक ! गायत्री कवचं देव ! कृपया कथय प्रभो । ॥ महादेव उवाच ॥ मूलाधारेषु या नित्या कुण्डली तत्त्व-रूपिणी । सूक्ष्माति सूक्ष्मा परमा विसतन्तु-स्वरूपिणी ॥ विद्युत-पुञ्ज-प्रतीकाशा कुण्डलाकृति-रूपिणी । परम-ब्रह्म गृहिणी पञ्चाशद् वर्ण-रूपिणी ॥ शिवस्य नर्तकी नित्या परम् ब्रह्म-पूजिता । ब्रह्मणः सैव गायत्री सच्चिदानन्दरूपिणी ॥ तद् भ्रमावर्त्तवातोऽयं… Read More


॥ श्री गायत्री कवचम् ॥ ॥याज्ञवल्क्य उवाचः॥ स्वामिन् सर्व-जगन्नाथ संशयोऽस्ति महान्मम् । चतुः षष्टि-कलानां च पातकानां तद्वद् ॥१ ॥ मुच्यते केन पुण्येन ब्रहा-रूपं कथं भवेत् । देहश्च देवता-रूपं मन्त्र-रूपं विशेषतः ॥२ ॥ क्रमतः श्रोतुमिच्छामि कवचं विधि-पूर्वकम् । ॥ब्रह्मोवाचः॥ विनियोगः- “ॐ अस्य श्री गायत्री-कवचस्य ब्रह्म-विष्णु-रुद्रा ऋषयः ऋग्यजुः सामाथर्वाणिच्छन्दांसि पर-ब्रह्म-स्वरूपिणी गायत्री देवता भूः बीजम् भुवः शक्तिः स्वः… Read More


ॐ श्रीपरमात्मने नम: ॥ श्रीगणेशाय नम ॥ ॥ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ भविष्यपुराण ब्राह्म पर्व गर्भाधान से यज्ञोपवीत पर्यन्त संस्कारों की संक्षिप्त विधि, अन्न-प्रशंसा तथा भोजन-विधि के प्रसंग में धनवर्धन की कथा, हाथों के तीर्थ एवं आचमन-विधि राजा शतानीक ने कहा — हे मुने ! आपने मुझे जातकर्मादि संस्कारों के विषय में बताया, अब आप इन… Read More


व्यापार वृद्धि शाबर मंत्र विधिः- व्यापार का दैनिक कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व यदि इस मंत्र का 108 बार उच्चारण करके दुकान खोलें और व्यापार का दैनिक कार्य प्रारम्भ करें तो उस दिन ब्रिकी बढ़ती है और किसी प्रकार का कोई उपद्रव या परेशानी नहीं आती। इस मंत्र को सिद्ध करने की कोई आवश्यकता नहीं… Read More


ॐ श्रीपरमात्मने नम: ॥ श्रीगणेशाय नम ॥ ॥ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ भविष्यपुराण ब्राह्म पर्व व्यास-शिष्य महर्षि सुमन्तु एवं राजा शतानीक का संवाद, भविष्यपुराण की महिमा एवं परम्परा सृष्टि-वर्णन, चारों वेद-पुराण एवं चारों वर्णों की उत्पत्ति, चतुर्विध सृष्टि, काल-गणना, युगों की संख्या, उनके धर्म तथा संस्कार “नारायंण नमस्कृत्य नर व नरोत्तम। देवी सरस्वतीं व्यास ततो जयपुदीरयेत्॥”… Read More


शाबर तंत्र साधना से पूर्व आवश्यक निर्देश किसी भी साधक को कोई भी तांत्रिक प्रयोग अथवा तंत्र-मंत्र-यंत्र साधना करने से पूर्व अपने इष्टदेव का स्मरण तथा अपने पूज्य गुरूदेव का आशीर्वाद व मार्गदर्शन तथा निम्नांकित आवश्यक निर्देशों एवं सावधानियों का पालन करना अत्यावश्यक होता है- * मंत्रतंत्र का जप अंग-शुद्धि, सरलीकरण एवं विधि-विधान पूर्वक करना… Read More


|| गोरक्षनाथाष्टकम् || (हंसचित्रम्) योगीन्द्राप्त-हितोपदेश-विशदा देशार्थ-तत्वं शिरो। ज्ञानं कर्म च दक्षिणोत्तर-गता, वक्षोभ्यपक्षा-वसौ। आत्मा योगवरः स्वरूप-विषया पुच्छे प्रतिष्ठा-चितो । माया यस्य जगत्वयं विजयते हंसः स नाथो विभुः ॥ 1॥ द्वैतं दक्षिणपक्ष एष विहितोऽद्वैतं विविच्योत्तरः पक्षो योग-शिरो विशेष-परमा द्वैतं तदात्मा महान् । पुच्छं केवल-भाव एक विदुषां, हृत्पद्मनीड मह, न्माया यस्य जगत्त्रय विजयते, हंसः स नाथोविभु ॥ 2… Read More


|| गोरक्ष संकट मोचन || बाल योगी भये रूप लिये तब, आदि नाथ लियो अवतारो । ताहि समै सुख भयो सिद्धो का, तब शिव गोरक्ष नाथ उचारो || भेष भगवान ने की विनती, तब अनुपान शिला पे ज्ञान विचारो। को नहि जानत है जग में, शिव गोरक्षनाथ है नाम तुम्हारो ॥१ ॥ सतयुग में भये… Read More


|| श्री नाथस्तोत्र राजः || नमोऽहं कलये हंसो, हंसोऽहं कलयेऽन्वहम्। नमोऽहं कलये हंसो, हंसोऽहं कलयऽन्वहम् ॥1॥ अनन्यमानसो हंसो, मानसं पदमाश्रितः। अनन्यमानसो हंसो, मानसं पदमाश्रितः ॥ 2 ॥ रक्षा मा दक्ष गोरक्ष ! क्षरमोक्षद माऽक्षर। जयकाम महाराज, जराहा मम कायज ॥ 3 ॥ घनसारद नाथाय, यथा नाद रसा नघ। ते स्तुमो नरधामारे, हेमाधार ! नमोऽस्तुते ॥… Read More


|| गोरक्ष गायत्री || ॐ गुरुजी! सत् नम: आदेश ! गुरूजी को आदेश। ओऽमकारो शिव रुपी, मध्याह्ने हंसरुपी सन्ध्याया साधु रुपी, परमहंस दो अक्षर, गुरू तो गोरख काया तो गायत्री ॐ ब्रह्म, सोहम् शक्ति, शून्य माला अवगत पिता, विहंगम जात, अभय पन्थ, सूक्ष्म वेद, असंख्य शाखा, हरमुख प्रवर, निरंजन गौत्र, त्रिकुटी क्षैत्र, जुगति जोत, जल… Read More