श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-61 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ इकसठवाँ अध्याय इन्द्र का ब्रह्महत्या के पाप से ग्रस्त होना, महर्षि गौतम की सम्मति से इन्द्र का ब्रह्मलोक जाना तथा इन्द्र और ब्रह्मा का वैकुण्ठलोक जाना अथः एकषष्टितमोऽध्यायः गौतमवाक्याद्ब्रह्ममयीस्थानानुसन्धानार्थं देवराजस्य चतुर्मुखविष्णुलोकगमनं श्रीमहादेवजी बोले — महामते ! युद्ध में दुर्धर्ष वृत्रासुर का संहार करके ऐरावत हाथी… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-60 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ साठवाँ अध्याय वृत्रासुर के वध के लिये देवराज इन्द्र का दधीचि से अस्थियाँ माँगना, दधीचि का प्राण-त्याग, इन्द्र द्वारा दधीचि की अस्थियों से वज्र बनाकर वृत्रासुर का संहार अथः षष्टितमोऽध्यायः दधीचिप्राणत्यागे देवराजस्य ब्रह्महत्यावर्णनं श्रीनारदजी बोले — देवदेव ! महेश्वर ! प्रभो ! जिस तरह से… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-59 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उनसठवाँ अध्याय महाकाली के दिव्य लोक का वर्णन अथः एकोनषष्टितमोऽध्यायः श्रीब्रह्ममयीमहाकालीस्थानवर्णनं श्रीनारदजी बोले — देवदेव! जगन्नाथ! कृपामय ! जगत्प्रभो ! मैं पुनः आपसे भगवती का उत्कृष्ट आख्यान सुनना चाहता हूँ ॥ १ ॥ कैलासपर्वत पर शिवसांनिध्य में भगवती की जो मूर्तियाँ हैं, उनमें भगवती दुर्गा… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-58 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अट्ठावनवाँ अध्याय श्रीकृष्ण, बलराम, पाण्डवों तथा अन्य वृष्णिवंशियों का स्वर्गगमन अथः अष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः स्वर्गयात्रागमनं श्रीमहादेवजी बोले — मुनिश्रेष्ठ ! इस प्रकार छलपूर्वक पृथ्वी का भार मिटाकर श्रीकृष्ण ने पृथ्वीतल से पुनः अपने धाम आने का मन में निश्चय किया ॥ १ ॥ इसी बीच पृथ्वीतल पर… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-57 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ सत्तावनवाँ अध्याय महाभारतयुद्ध का वर्णन अथः सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्याय महाभारतयुद्धवर्णनं श्रीमहादेवजी बोले — तब पृथ्वी के भार का हरण करने के लिये महाकाली कृष्णरूप से अपनी सेना को धृतराष्ट्रपुत्रों की सहायता में नियोजित कर स्वयं पूर्णरूप से सात्यकिसहित पाण्डवों के पास चली आयी । महामते ! अनेक… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-56 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ छप्पनवाँ अध्याय पाण्डवों द्वारा भगवती की स्तुति, भगवती द्वारा प्रसन्न होकर विजय का आशीर्वाद देना, पाण्डवों का अज्ञातवास के लिये राजा विराट के नगर में जाना, भीम द्वारा कीचक और उपकीचकों का वध, अभिमन्यु-विवाह अथः षट्पञ्चाशत्तमोऽध्यायः कीचकवधोपाख्यानं श्रीमहादेवजी बोले — मुनिश्रेष्ठ ! बहुत काल तक… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-55 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पचपनवाँ अध्याय स्वयंवर में न बुलाये जाने पर श्रीकृष्ण द्वारा रुक्मिणी का हरण, राजसूययज्ञ के लिये पाण्डवों की विजययात्रा तथा जरासन्धवध, राजसूय यज्ञ में कृष्ण की प्रथम पूजा का शिशुपाल द्वारा विरोध तथा उसका वध, द्यूतक्रीड़ा में हारकर पाण्डवों का वनवास अथः पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्यायः राजसूयादनन्तरं शिशुपालहननपूर्वकद्यूते… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-54 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ चौवनवाँ अध्याय नारदजी का कंस को श्रीकृष्ण के देवकीपुत्र होने की बात बताना, अक्रूर का गोकुल से श्रीकृष्ण और बलराम को ले आना, कुवलयापीड, चाणूर और मुष्टिक का वध, श्रीकृष्ण द्वारा कालिकारूप से कंस का संहार करना तथा उग्रसेन का राज्याभिषेक कर माता- पिता को… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-53 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ तिरपनवाँ अध्याय भगवान् श्रीकृष्ण की बाललीला – धेनुकासुरवध, कालियमर्दन, रासलीला तथा वृषभासुर वध अथः त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे राधया सह रासक्रीडावर्णने कंसप्रेरितवृषभासुरवधः श्रीनारद जी बोले — पार्वती प्राणवल्लभ महेश्वर ! श्रीकृष्ण-रूपवाली भगवती के चरित्र का संक्षेप में मुझसे वर्णन कीजिए ॥ १ ॥ जिस प्रकार उन्होंने गोकुल… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-52 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ बावनवाँ अध्याय प्रजापति दक्ष और प्रसूति की उग्र तपस्या तथा वरप्राप्ति, दक्ष और प्रसूति का गोकुल में नन्द और यशोदा के रूप में जन्म लेना अथः द्विपञ्चाशत्तमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे दक्षप्रसूतिनन्दयशोदाजन्मवर्णनं श्रीनारद जी बोले — देवकी के गर्भ से बालकरूप में प्रादुर्भूत होकर साक्षात् भगवती गोकुल में… Read More