श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -023 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ तेईसवाँ अध्याय विभिन्न कल्पों में होनेवाले सद्योजातादि शिवावतारों का वर्णन, विभिन्न लोकों की स्थिति तथा महारुद्र का विश्वरूपत्व श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे त्रयोविंशोऽध्यायः विविधकल्पवर्णनं सूतजी बोले —  ब्रह्माजी का वह वचन सुनकर उनके प्रबोधन के लिये ब्रह्मरूप भगवान् शिव ने मुसकराकर उनसे कहा —  ॥ १ ॥ जब श्वेतकल्प था,… Read More


श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -022 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ बाईसवाँ अध्याय महादेवजी द्वारा विष्णु और ब्रह्मा को वरदान, सृष्टि के लिये ब्रह्माजी द्वारा तप करना तथा सर्पों एवं रुद्रों की सृष्टि श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे द्वाविंशतितमोऽध्यायः रुद्रोत्पत्तिवर्णनं सूतजी बोले —  [ हे मुनियो ! ] उन ब्रह्मा तथा विष्णु को अत्यन्त विनीत भाव से सत्य स्तुति करते देखकर सुन्दर,… Read More


श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -021 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ इक्कीसवाँ अध्याय ब्रह्मा तथा विष्णुद्वारा की गयी भगवान् महेश्वरकी स्तुति एवं उसका माहात्म्य श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे एकविंशोऽध्यायः ब्रह्मविष्णु कृतं महेश्वरस्तुतिः सूतजी बोले —  तदनन्तर ब्रह्मा को आगे करके वे गरुड़ध्वज भगवान् विष्णु अतीत, भविष्य तथा वर्तमान कल्पों से सम्बन्धित महादेवजी के वेदप्रतिपादित नामों से इस स्तोत्र का वाचन करने… Read More


श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -020 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ बीसवाँ अध्याय शेषशय्या पर आसीन भगवान् विष्णु के नाभिकमल से ब्रह्माजी का प्रादुर्भाव, भगवान् शिव की माया से दोनों का विमोहित होना, विष्णु द्वारा ब्रह्मा के प्रति शिवमाहात्म्य का कथन श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे विंशोऽध्यायः ब्रह्मप्रबोधनं ऋषिगण बोले —  [ हे सूतजी ! ] प्राचीनकाल में पाद्म कल्प में ब्रह्माजी… Read More


श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -019 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ उन्नीसवाँ अध्याय महादेवजी द्वारा ब्रह्मा एवं विष्णु को वर प्रदान करना तथा उमामहेश्वर – पूजन के रूप में लिङ्गपूजन की परम्परा का प्रारम्भ श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे एकोनविंशोऽध्यायः विष्णुप्रबोधं सूतजी बोले —  तदनन्तर महादेवजी ने कहा —  हे श्रेष्ठ देवद्वय (ब्रह्मा, विष्णु ) ! मैं आप दोनों पर प्रसन्न हूँ… Read More


श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -018 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ अठारहवाँ अध्याय विष्णु द्वारा की गयी भगवान् महेश्वर की स्तुति तथा उसका माहात्म्य श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे अष्टादशोऽध्यायः श्रीविष्णुकृतं महेश्वरस्तोत्रं भगवान् विष्णु बोले —  अद्वितीय तथा नाशरहित प्रणवरूप रुद्र को नमस्कार है। अकाररूप परमात्मा तथा उकाररूप आदिदेव विद्या देह को नमस्कार है ॥ १ ॥ तीसरे मकाररूप परमात्मा शिव और… Read More


श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -017 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ सत्रहवाँ अध्याय ब्रह्मा तथा विष्णु के समक्ष ज्योतिर्मय महालिङ्ग का प्राकट्य, ब्रह्मा और विष्णु द्वारा हंस एवं वाराहरूप धारणकर लिङ्ग के मूलस्थान का अन्वेषण, लिङ्गमध्य से शब्दमय उमा- महेश्वर का प्रादुर्भाव और ईशानादि पाँच शिवरूपों की उत्पत्ति श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे सप्तदशोऽध्यायः लिङ्गोद्भवं सूतजी बोले —  हे मुनियो ! इस… Read More


श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -016 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ सोलहवाँ अध्याय विश्वरूप नामक कल्प में शिवस्वरूप भगवान् ईशान का प्रादुर्भाव, ब्रह्माजी द्वारा ईशान की स्तुति श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे षोडशोऽध्यायः ईशानमाहात्म्यकथनं सूतजी बोले — हे मुनिश्रेष्ठो ! असित कल्प के अनन्तर ‘विश्वरूप’ नाम से विख्यात ब्रह्माजी का दूसरा अत्यन्त अद्भुत कल्प आरम्भ हुआ ॥ १ ॥ समस्त जगत् के… Read More


श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -015 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ पन्द्रहवाँ अध्याय अघोरेश माहात्म्य तथा अघोर मन्त्र के जप से विविध पातकों का विनाश श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे पञ्चदशोऽध्यायः अघोरेश माहात्म्यं सूतजी बोले — [हे मुनियो!] उस भयावह कृष्ण कल्प के बीत जाने पर ब्रह्माजी उन ब्रह्मस्वरूप देवदेवेश अघोर की स्तुति करने लगे ॥ १ ॥ उस स्तुति से प्रसन्न… Read More


श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -014 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ चौदहवाँ अध्याय असितकल्प में शिवस्वरूप भगवान् अघोर का प्राकट्य और उनका माहात्म्य श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे चतुर्दशोऽध्यायः अघोरोत्पत्तिवर्णनं सूतजी बोले — इसके बाद उस पीतकल्प के बीत जाने पर ब्रह्मा का दूसरा कल्प प्रवृत्त हुआ। वह असित कल्प नाम वाला था ॥ १ ॥ एक हजार दिव्य वर्षों तक जब… Read More