पुष्प वशीकरण मन्त्र पुष्प वशीकरण मन्त्र विधिः- किसी सिद्धि योग ग्रहण काल गुरु-पुष्य-योग अथवा अन्य किसी शुभ योग में विधिपूर्वक तथा शुद्धतापूर्वक एकान्त में निम्न दोनों में से किसी एक मन्त्र को 10,000 जप-संख्या पूरी करें। फिर 108 बार आहुति देकर इसे प्रभावी बनायें। इस प्रकार यह मंत्र सिद्ध हो जाता है। फिर जिस व्यक्ति को वशीभूत करना… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय २३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण ( ब्राह्मपर्व ) अध्याय – २३ चतुर्थी-कल्प-वर्णन में गणेशजी का विघ्न-अधिकार तथा उनकी पूजा-विधि राजा शतानीक ने सुमन्तु मुनि से पूछा – विप्रवर ! गणेशजी को गणों का राजा किसने बनाया और बड़े भाई कार्तिकेय के रहते हुए ये कैसे विघ्नों के अधिकारी हो गये… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय २२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – २२ चतुर्थी-व्रत एवं गणेशजी की कथा तथा सामुद्रिक शास्त्र का परिचय सुमन्तु मुनि ने कहा – राजन् ! तृतीया-कल्प का वर्णन करने के अनन्तर अब मैं चतुर्थी-कल्प का वर्णन करता हूँ । चतुर्थी-तिथि में सदा निराहार रहकर व्रत करना चाहिये । ब्राह्मण… Read More
पान वशीकरण मन्त्र पान वशीकरण मन्त्र मन्त्रः- “काम देश कामाख्या देवी जहां बसे इस्माइल जोगी इस्माइल जोगी ने दिया पान बीड़ पहला बीड़ा आती जाती दूजा बीड़ा दिखावे छाती तीजा बीड़ा अंग लिपटाई ‘अमुक’ खाय पास चली आई दुहाई गुरु गोरखनाथ की।”… Read More
पान वशीकरण मन्त्र पान वशीकरण मन्त्र मन्त्रः- “हरे पान हरियाले पान ॥ चिकनी सुपारी श्वैत खैर ॥ दाहिने कर चूना ॥ मोहि लेय पान ॥ हाथ में दे ॥ हाथ रस ले ॥ ये पेट मे या ॥ पेट रस ले ॥ श्री नरसिंह वीर॥ थारी शक्ति ॥ मेरी भक्ति॥ फुरो मंत्र ॥ ईश्वर महादेव की वाचा ॥”… Read More
पान-तिलक वशीकरण मन्त्र पान-तिलक वशीकरण मन्त्र मन्त्रः- ”ॐ नमो भगवति मातंगेश्वरि सर्वमुखरंजिनि, सर्वेषा महामाये मातंगे कुमारिके नन्द नन्द जिह्वे सर्वलोक वश्यं कुरु स्वाहा।”… Read More
नकसीर स्तम्भन मन्त्र नकसीर स्तम्भन मन्त्र मन्त्रः- “ॐ नमो गुरु की आज्ञा सार-सार महासागरे बांधूं सातवार फिर बांधूं तीन बार लोहे की सार बांधे हनुमन्त वीर पाके न फूटे तुरत सोखे।”… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय २१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – २१ तृतीया-कल्प का आरम्भ. गौरी-तृतीया-व्रत-विधान और उसका फल सुमन्तु मुनि ने कहा – राजन ! जो स्त्री सब प्रकार का सुख चाहती है, उसे तृतीया का व्रत करना चाहिये । उस दिन नमक नहीं खाना चाहिये । इस विधि से उपवास-पूर्वक जीवन-पर्यन्त… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय २० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – २० फल-द्वितीया (अशून्यशयन-व्रत) का व्रत-विधान और द्वितीया-कल्प की समाप्ति राजा शतानीक ने कहा – मुने ! कृपाकर आप फल-द्वितीया का विधान कहें, जिसके करने से स्त्री विधवा नहीं होती और पति-पत्नी का परस्पर वियोग भी नहीं होता । सुमन्तु मुनि ने कहा… Read More