श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -063 January 23, 2026 | aspundir | Leave a comment श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -063 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ तिरसठवाँ अध्याय दक्ष प्रजापति द्वारा मैथुनी सृष्टि का प्रादुर्भाव, दक्षकन्याओं की वंश-परम्परा तथा ऋषि वंश वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे त्रिषष्टितमोऽध्यायः देवादिसृष्टिकथनं ऋषिगण बोले — हे सूतजी ! अब आप देवताओं, दानवों, गन्धर्वों, उरगों और राक्षसों की उत्पत्ति का उत्तम विधि से यथाक्रम वर्णन कीजिये ॥ १ ॥ सूतजी बोले… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -062 January 23, 2026 | aspundir | Leave a comment श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -062 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ बासठवाँ अध्याय उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव का आख्यान, ध्रुव की तपस्या तथा ध्रुवलोक संस्थान का वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे द्विषष्टितमोऽध्यायः भुवनकोशे ध्रुवसंस्थानवर्णनं ऋषिगण बोले — [हे सूतजी !] बुद्धिमानों में श्रेष्ठ ध्रुव भगवान् विष्णु की कृपा से ग्रहों के मेढ़ीभूत (मध्य स्थान वाले) किस प्रकार हुए, [हम लोगों को]… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -061 January 23, 2026 | aspundir | Leave a comment श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -061 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ इकसठवाँ अध्याय ज्योतिः सन्निवेश में ग्रहों के स्वरूप तथा नक्षत्रों और ग्रहों की पारस्परिक स्थिति का वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे एकषष्टितमोऽध्यायः ग्रहसंख्यावर्णनं सूतजी बोले — [हे ऋषियो!] रात्रि में सूर्यकिरणों से प्रकाशित होने वाले ये सभी क्षेत्र भारतवर्ष में अनुष्ठित पुण्यों द्वारा पुण्यात्माओं के होते हैं, तदनन्तर सूर्य सुकृतों… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -060 January 22, 2026 | aspundir | Leave a comment श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -060 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ साठवाँ अध्याय मंगल, बुध, बृहस्पति, शनि आदि ग्रहों एवं सूर्य के माहात्म्य का वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे षष्टितमोऽध्यायः सूर्यप्रभावर्णनं सूतजी बोले — सूर्य अग्नि के रूप में पढ़ा जाता है और चन्द्रमा को जल कहा गया है। शेष [ भौम आदि ] पाँच ग्रहों को ईश्वर तथा इच्छा के… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -059 January 22, 2026 | aspundir | Leave a comment श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -059 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ उनसठवाँ अध्याय पार्थिव, शुचि तथा वैद्युत नाम से अग्नि के तीन रूपों का वर्णन, बारह मास के बारह सूर्यों का नामनिर्देश एवं सूर्यरश्मियों का वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे एकोनषष्टितमोऽध्यायः सूर्यरश्मिस्वरूपकथनं सूतजी बोले — यह सुनकर मुनिलोग संशय में पड़ गये और उन्होंने उन रोमहर्षण (सूतजी)-से यह बात पूछी ॥… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -058 January 22, 2026 | aspundir | Leave a comment श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -058 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ अट्ठावनवाँ अध्याय ब्रह्मा द्वारा शिव के आदेश से ग्रहों, नक्षत्रों, जलों आदि के अधिपति के रूप में सूर्य, चन्द्रमा, वरुण आदि की प्रतिष्ठा का निरूपण श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे अष्टपञ्चाशत्तमोऽध्याय सूर्याद्यभिषेककथनं ऋषिगण बोले — [ हे सूतजी ! ] सर्वात्मा प्रजापति ब्रह्माजी ने सभी प्रमुख देवताओं तथा दैत्यों को अधिपति… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -057 January 22, 2026 | aspundir | Leave a comment श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -057 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ सत्तावनवाँ अध्याय बुध आदि ग्रहों के रथों का स्वरूप, ग्रह-नक्षत्रों एवं तारागणों द्वारा ध्रुव का परिभ्रमण, ग्रहों का स्वरूप – विस्तार तथा उनकी गति का निरूपण श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्यायः ज्योतिश्चक्रे ग्रहचारकथनं सूतजी बोले — [ हे ऋषियो ! ] चन्द्रमा के पुत्र [बुध] -का रथ जल- अग्निमय और… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -056 January 22, 2026 | aspundir | Leave a comment श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -056 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ छप्पनवाँ अध्याय सोम (चन्द्रमा)-की स्थिति एवं गति का निरूपण, चन्द्रकलाओं के ह्रास तथा वृद्धि का वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे षट्पञ्चाशत्तमोऽध्यायः सोमवर्णनं सूतजी बोले — चन्द्रमा वीथियों में स्थित नक्षत्रों में चलता है। उसके रथ को तीन पहियों वाला तथा दोनों ओर घोड़ों से युक्त जानना चाहिये। यह सौ अरों… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -055 January 21, 2026 | aspundir | Leave a comment श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -055 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ पचपनवाँ अध्याय शिवस्वरूप भगवान् सूर्य के रथ तथा चैत्रादि बारह मासों में रथ के साथ भ्रमण करने वाले देवता, मुनि, नाग, गन्धर्व आदि का वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्यायः सूर्यरथनिर्णय सूतजी बोले — [हे ऋषियो ! ] मैं संक्षेप में सूर्य के रथ और चन्द्रमा तथा अन्य ग्रहों के… Read More
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -054 January 21, 2026 | aspundir | Leave a comment श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -054 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ चौवनवाँ अध्याय ज्योतिः सन्निवेश वर्णन में लोकपालों की पुरियों का वर्णन, सूर्य की स्थिति तथा उसकी गति से होने वाले अयन एवं ऋतुओं की स्थिति, ध्रुवस्थान तथा मेघों का स्वरूप और वृष्टि का प्रादुर्भाव श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे चतुःपञ्चाशत्तमोऽध्यायः ज्योतिश्चक्रे सूर्यगत्यादिकथनं सूतजी बोले — [हे ऋषियो ! ] देवक्षेत्रों को… Read More