श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-107 November 12, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-107 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ सातवाँ अध्याय मयूरेश्वर के चौदहवें वर्ष में मुनियों के कहने पर पार्वती का इन्द्रयाग करना, मयूरेश्वर का कल तथा विंकल नामक दैत्यों का वध और फिर इन्द्रयाग को विध्वंस करना, रुष्ट होकर इन्द्र का मयूरेशपुरवासियों तथा मयूरेशपुरी को संतप्त करना, मयूरेश्वर का सबकी रक्षा करना एवं इन्द्र का… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-106 November 11, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-106 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ छठवाँ अध्याय मयूरेश द्वारा तेरहवें वर्ष में मंगल दैत्य का वध और शिव के ललाट पर स्थित चन्द्रमा के हरण की लीला, मयूरेश का गणों का स्वामी होना अथः षडधिकशततमोऽध्यायः शिवललाटगतचन्द्रहरणं ब्रह्माजी बोले — मयूरेश के तेरहवें वर्ष की बात है, एक दिन उन मयूरेश ने निद्रा में… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-105 November 11, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-105 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ पाँचवाँ अध्याय मयूरेश की बारहवीं जन्मतिथि के महोत्सव में विष्णुभक्त ब्राह्मण विश्वदेव का वहाँ आना, पार्वती द्वारा उनका आतिथ्य, किंतु विश्वदेव द्वारा यह कहकर उनका आतिथ्य स्वीकार नहीं करना कि वे केवल विष्णु को ही भगवान् मानते हैं अन्य को नहीं, तब मयूरेश का अपनी माया द्वारा उनकी… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-104 November 10, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-104 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ चारवाँ अध्याय ब्रह्माजी द्वारा मयूरेश की स्तुति, स्तुति का माहात्म्य, ‘कमण्डलुभवा’ नामक नदी का प्राकट्य, मयूरेश की माया से ब्रह्मा का मोहित होना, मयूरेश की परीक्षा के लिये ब्रह्मा द्वारा सृष्टि का तिरोधान, मयूरेश द्वारा पुनः सृष्टि कर लेना और ब्रह्माजी को अपने विश्वरूप का दर्शन कराना अथः… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-103 November 10, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-103 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ तीनवाँ अध्याय कमलासुर और मयूरेश का भीषण युद्ध, कमलासुर के रक्तबिन्दुओं से अनेक दैत्यों की उत्पत्ति, देवी सिद्धि-बुद्धि की सेना के सैनिकों द्वारा उन असुरों का भक्षण, मयूरेश्वर द्वारा कमलासुर का वध और मुनिगणों द्वारा की गयी मयूरेश्वर – स्तुति अथः त्र्युत्तरशततमोऽध्यायः कमलासुरवध ब्रह्माजी बोले — उस दैत्य… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-102 November 9, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-102 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ दोवाँ अध्याय दैत्य कमलासुर और मयूरेश्वर के युद्ध का वर्णन अथः द्व्युत्तरशततमोऽध्यायः कमलासुरसङ्ग्राम ब्रह्माजी बोले — अपनी बहुत-सी सेना के नष्ट हो जाने पर दैत्यराज कमलासुर अत्यन्त क्रुद्ध हो गया और वह अश्व पर आरूढ़ होकर हाथ में तलवार लेकर मयूरेश के साथ युद्ध करने के लिये निकल… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-101 November 9, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-101 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ एकवाँ अध्याय मयूरेश्वर द्वारा दसवें वर्ष में दैत्य कमलासुर की सेना का वध, मरे हुए सैनिकों का मयूरेश्वर की कृपा से मुक्ति प्राप्त करना अथः एकशततमोऽध्यायः दैत्यसेनावध ब्रह्माजी बोले — दसवें वर्ष की बात है, एक दिन जब भगवान् महेश्वर सुखपूर्वक बैठे हुए थे, उनके वामभाग में देवी… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-100 November 8, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-100 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ सौवाँ अध्याय नागलोक में नागकन्याओं द्वारा मयूरेश्वर का स्वागत-सत्कार, नागराज वासुकि को मयूरेश्वर द्वारा आभूषण के रूप में धारण करना, सर्पों तथा मयूर का युद्ध, शेषनाग को आभूषण के रूप में धारण करना, शेषनाग द्वारा मयूरेश की स्तुति, शेषनाग द्वारा सम्पाती आदि को बन्धन-मुक्त करना, मयूरेश्वर का नागलोक से धरती… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-099 November 8, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-099 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ निन्यानबेवाँ अध्याय नौवें वर्ष में गुणेश्वर का बालकों के साथ जलक्रीडा करना, गुणेश द्वारा अश्वरूपी दैत्य का वध, नागकन्याओं का गुणेश को नागलोक ले जाना, भगासुर नामक दैत्य के वध की कथा अथः नवनवतिमोऽध्यायः मयूरेशपातालप्रयाणं ब्रह्माजी बोले — गुणेश्वर ने नौवें वर्ष की अवस्था में एक अद्भुत कार्य किया। एक… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-098 November 7, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-098 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ अट्ठानबेवाँ अध्याय आठवें वर्ष में गुणेश्वर द्वारा विचित्र दैत्य का वध और विनता के गर्भ से उत्पन्न अण्ड का भेदन, उसमें से मयूर नामक पक्षी का प्राकट्य, विनता द्वारा गुणेश्वर की स्तुति, गुणेश्वर का मयूर को अपना वाहन बनाना और मयूरेश्वर नाम से प्रसिद्ध होना अथः अष्टनवतितमोऽध्यायः शिखण्डिवरप्रदानं ब्रह्माजी बोले… Read More