भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १८८ से १८९ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १८८ से १८९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १८८ से १८९ पञ्चमहायज्ञ एवं अतिथि-माहात्म्य-वर्णन, सौर-धर्म में दानकी महत्ता और पात्रापात्र का निर्णय तथा पञ्च महापातक सप्ताश्ववाहन (भगवान् सूर्य) ने कहा — हे वीर ! जो प्राणी सूर्य, अग्नि, गुरु तथा ब्राह्मण… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १८७ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १८७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १८७ श्रद्धा की महिमा, खखोल्क-मन्त्र का माहात्म्य तथा गौ की महिमा अरुणने पूछा — भगवन् आदित्यदेव ! मनुष्य किस पुण्यकर्म का सम्पादन कर स्वर्ग जाते हैं ? कर्मयज्ञ, तपोयज्ञ, स्वाध्याययज्ञ, ध्यानयज्ञ और ज्ञानयज्ञ— इन पाँच… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १८६ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १८६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १८६ सौर-धर्म में शुद्धि-प्रकरण भगवान् भास्कर ने कहा — खगाधिप ! ब्राह्मणों को नित्य पवित्र तथा मधुरभाषी होना चाहिये, उन्हें प्रतिदिन स्नानादि से पवित्र हो चन्दनादि सुगन्धित द्रव्यों को धारणकर देवताओं का पूजन आदि करना… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १८५ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १८५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १८५ मातृ-श्राद्ध की संक्षिप्त विधि भगवान् आदित्य ने कहा — अरुण ! रात्रि में श्राद्ध नहीं करना चाहिये । रात्रि में किया गया श्राद्ध राक्षसी श्राद्ध कहा जाता है । दोनों संध्याओं में और सूर्य… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १८३ से १८४ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १८३ से १८४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १८३ से १८४ श्राद्ध के विविध भेद तथा वैश्वदेव-कर्म की महिमा भगवान् सूर्य ने अनूरु (अरुण) — से कहा — अरुण ! द्विजमात्र को विधिपूर्वक पञ्च-महायज्ञ— भूतयज्ञ, पितृयज्ञ, ब्रह्मयज्ञ, दैवयज्ञ और मनुष्ययज्ञ करना… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १८१ से १८२ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १८१ से १८२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १८१ से १८२ विविध स्मृति-धर्मों तथा संस्कारों का वर्णन राजा शतानीक ने कहा — ब्रह्मन् ! पाँच प्रकार के जो स्मृति आदि धर्म हैं, उन्हें जानने की मुझे बड़ी ही अभिलाषा है ।… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १७५ से १८० भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १७५ से १८० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १७५ से १८० सौर-धर्म में शान्तिक कर्म एवं अभिषेक-विधि गरुड़जी ने पूछा— अरुण ! जो आधि-व्याधि से पीड़ित एवं रोगी, दुष्ट ग्रह तथा शत्रु आदि से उत्पीडित और विनायक से गृहीत है, उन्हें… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १७३ से १७४ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १७३ से १७४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १७३ से १७४ सौर-धर्म की महिमा का वर्णन, ब्रह्माकृत सूर्य-स्तुति राजा शतानीक ने कहा — ब्राह्मणश्रेष्ठ ! आप सौरधर्म को पुनः विस्तार से वर्णन कीजिये । सुमन्तु मुनि बोले — महाबाहो ! तुम… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १७१ से १७२ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १७१ से १७२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १७१ से १७२ सौरधर्म में सदाचरण का वर्णन सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! अब मैं सौरधर्म से सम्बद्ध सदाचारों का संक्षेप में वर्णन करता हूँ । सूर्य-उपासक को भूखे-प्यासे, दीन-दुःखी, थके हुए,… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६९ से १७० भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६९ से १७० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६९ से १७० भगवान् सूर्य के निमित्त गृह एवं रथ आदि के दान का माहात्म्य सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! अपने वित्त के अनुसार मिट्टी, लकड़ी, पत्थर तथा पके हुए ईंटों से… Read More