ऋणहर्ता गणेश – मन्त्र का विधान कैलासपर्वते रम्ये शम्भुं चन्द्रार्धशेखरम् । षडाम्नायसमायुक्तं पप्रच्छ नगकन्यका ॥ रमणीय कैलास पर्वत पर छः आम्नायों से युक्त चन्द्रार्धशेखर भगवान् शिव बैठे थे, उस समय गिरिराजनन्दिनी पार्वतीजी ने उनसे पूछा — पार्वत्युवाच देवेश परमेशान सर्वशास्त्रार्थपारग । उपायमृणनाशस्य कृपया वद साम्प्रतम् ॥ पार्वती बोलीं — सम्पूर्ण शास्त्रों के अर्थ-ज्ञान में पारंगत… Read More


एकाक्षरगणपति-मन्त्र के जप का विधान         स्नान-संध्या-वन्दन आदि से निवृत्त हो, शुद्ध आसन पर आसीन साधक जप प्रारम्भ करने से पूर्व आचमन और प्राणायाम करके निम्नांकितरूप से संकल्प करे — संकल्प — ओमद्यैतस्य श्रीब्रह्मणो द्वितीयपरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे अमुकजनपदे नगरे ग्रामे वा कलियुगे प्रथमचरणे अमुकसंवत्सरे अमुकमासे अमुकपक्षे अमुकतिथावमुक- वासरान्वितायाममुकामुकराशिस्थितेषु सूर्यादिषु नवग्रहेषु सत्सु — एवं विधग्रहगुणविशेषण… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-155 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ पचपनवाँ अध्याय गणेशपुराणीय माहात्म्य-निरूपण के प्रसंग में विविध इतिहास एवं ग्रन्थ की फलश्रुति अथः पञ्चपञ्चाशदुत्तरशततमोऽध्यायः फलश्रुति निरूपणं सूतजी बोले — हे द्विजो ! इस पुराण का एक बार भी श्रवण करने से जन्म-मरणरूप बन्धन से मुक्ति मिल जाती है। यदि इसे अनेक बार सुना जाय तो उस फल… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-154 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ चौवनवाँ अध्याय राजा के पूछने पर गणपति दूतों का काशी में स्थित विनायकों के आवरणों का क्रमिक वर्णन अथः चतुःपञ्चाशदुत्तरशततमोऽध्यायः षट्पञ्चाशद्विनायकवर्णनं ऋषिगण बोले — हे अनघ ! विमान में बैठे हुए राजा सोमकान्त ने [दूतों से] क्या पूछा था, उसे हम सभी सुनना चाहते हैं, अत: वह सब… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-153 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ तिरपनवाँ अध्याय राजा सोमकान्त का विमान से उतरकर पुत्र तथा नागरिकों से मिलना और उन सभी के साथ गणपतिलोक को जाना अथः त्रिपञ्चाशदुत्तरशततमोऽध्यायः सोमकान्तस्य देवपदप्राप्तिवर्णनं सूतजी बोले — राजा के वे चारों अमात्य महाराज सोमकान्त के सामने उपस्थित हुए और [ वहाँ विद्यमान ] सभी लोगों को प्रणामकर… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-152 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ बावनवाँ अध्याय अमात्यों का राजसभा में जाकर हेमकण्ठ को राजा के आगमन की सूचना देना और उसी प्रसंग में राजा सोमकान्त के ऊपर हुए गणपति – अनुग्रह आदि का वर्णन करना अथः द्विपञ्चाशदुत्तरशततमोऽध्यायः हेमकण्ठदर्शनं सूतजी बोले — [विमान में बैठे हुए] राजा सोमकान्त ने ऊपर से ही अपनी… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-151 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ इक्यावनवाँ अध्याय गणेशपुराण के श्रवण से राजा की रोगनिवृत्ति और गणपति के द्वारा प्रेषित विमान पर आरूढ़ होकर परमधामगमन अथः एकपञ्चाशदधिकशततमोऽध्यायः सोमकान्तविमानप्राप्ति वर्णनं सूतजी बोले — राजा सोमकान्त मुनीश्वर भृगु से इस प्रकार नित्यप्रति कथाश्रवण करते और कथाश्रवण के पुण्य की भावना करके सूखे आम्र के मूल में… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-150 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ पचासवाँ अध्याय व्यासमुनि को गणपतिदेव का साक्षात्कार और उनसे वर की प्राप्ति अथः पञ्चाशदुत्तरशततमोऽध्यायः व्यासानुग्रहसिद्धिक्षेत्रवर्णनं सोमकान्त ने कहा — हे भृगुजी ! उन महात्मा व्यासजी के समक्ष गजाननदेव किस रूप में प्रादुर्भूत हुए, वह सब बतलाइये, क्योंकि उस (के श्रवण ) – से पापनाश होता है ॥ १… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-149 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ उनचासवाँ अध्याय ब्रह्माजी के द्वारा व्यासदेव की जिज्ञासा का समाधान, कलियुगवर्णन एवं कलियुग के अन्त में गणपति का अवतीर्ण होकर धर्म-संस्थापन अथः एकोनपञ्चाशदुत्तरशततमोऽध्यायः मुनिविसर्जनं ब्रह्माजी बोले — इस प्रकार से [देवताओं, ऋषियों तथा राजाओं से] पूजित होकर विभु गजानन उस राजपूजित सदन (राजसदन नामक स्थान)-में भक्तों की कामनाओं… Read More


श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-148 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ अड़तालीसवाँ अध्याय तप, दान, ज्ञान, कर्म, कर्ता, सुख-दुःख, ब्रह्म एवं वर्णानुसार कर्मों के भेद तथा गणेशगीता की महिमा अथः अष्टचत्वारिंशादधिकशततमोऽध्यायः । गणेशगीता – त्रिविधवस्तुनिरूपणन्नामैकादशोऽध्यायः श्रीगणेशजी बोले — हे राजन् ! कायिक, वाचिक और मानसिक — इन तीन भेदों से तप भी तीन प्रकार का है। ऋजुता, आर्जव, पवित्रता,… Read More