श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-125 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-125 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ पच्चीसवाँ अध्याय कारागार से मुक्त हुए देवताओं का मयूरेश की महिमा का गान करना, चक्रपाणि द्वारा मयूरेश की प्रथम पूजा करने से इन्द्र का रुष्ट होना, महान् ध्वनि के साथ मयूरेश का प्रकट होना और पुनः पंचदेवों के रूप में अवतरित होना, ब्रह्माजी द्वारा सिद्धि-बुद्धि नामक कन्याओं का… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-124 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-124 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ चौबीसवाँ अध्याय सिन्धु-वध के अनन्तर माता-पिता तथा पत्नी का करुण विलाप, पत्नी दुर्गा का सती होना, पिता चक्रपाणि के द्वारा मयूरेश की स्तुति और उनसे गण्डकीनगर में चलने के लिये प्रार्थना करना, शिव-पार्वती तथा गणों एवं मुनियोंसहित मयूरेश का गण्डकीनगर के लिये प्रस्थान अथः चतुर्विंशत्युत्तरशततमोऽध्यायः सिन्धुनिरुद्धदेवगणमोचनं ब्रह्माजी बोले… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-123 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-123 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ तेईसवाँ अध्याय देव मयूरेश और दैत्य सिन्धुका भीषण संग्राम, मयूरेश का विराट्स्वरूप धारण करना, पुनः लघुस्वरूप में होकर मन्त्रों द्वारा अभिमन्त्रित परशु द्वारा सिन्धु का वध करना, शिव-पार्वती तथा देवों का उपस्थित होना और मयूरेश स्तोत्र द्वारा स्तुति करना अथः त्रयोविंशत्युत्तरशततमोऽध्यायः सिन्धुवध ब्रह्माजी बोले — दैत्यराज सिन्धु आ… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-122 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-122 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ बाईसवाँ अध्याय गौतम आदि महर्षियों तथा भगवान् शिव द्वारा मयूरेश की महिमा एवं पराक्रम का वर्णन, षडानन आदि का देवर्षि नारद के साथ संवाद, देव मयूरेश का दैत्य सिन्धु से युद्ध के लिये सन्नद्ध होना, किंतु नन्दी, भृंगी आदि का उन्हें रोककर स्वयं युद्ध के लिये प्रस्थान करना,… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-121 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-121 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ इक्कीसवाँ अध्याय राक्षसराज सिन्धु की सेना के साथ कार्तिकेय, वीरभद्र आदि देववीरों की सेनाओं का भयंकर संग्राम, सिन्धुसेना की पराजय, दैत्यराज सिन्धु का स्वयं युद्ध के लिये प्रस्थान, मयूरेश के परशु से उत्पन्न कालपुरुष द्वारा दैत्य सैनिकों का भक्षण किया जाना, चिन्तित होकर दैत्य सिन्धु का घर में… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-120 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-120 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ बीसवाँ अध्याय दूतों का धर्म एवं अधर्म की मृत्यु का समाचार दैत्यराज सिन्धु को देना, सिन्धु द्वारा शोक प्रकट करना, सखियों द्वारा समाचार मिलने पर सिन्धुपत्नी दुर्गा का राजसभा में उपस्थित हो पुत्रों के लिये विलाप करना, सखियों द्वारा उसे आश्वस्त करना, क्रुद्ध दैत्यराज सिन्धु का चतुरंगिणी सेना… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-119 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-119 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ उन्नीसवाँ अध्याय दैत्यराज सिन्धु का पराजित होकर चिन्ताग्रस्त होना, उसके दो पुत्रों धर्म तथा अधर्म का पिता को आश्वस्त करना तथा युद्ध के लिये आज्ञा माँगना, सेना लेकर दोनों का युद्धार्थ प्रस्थान, वीरभद्र, कार्तिकेय, हिरण्यगर्भ तथा भूतराज की सेनाओं का दैत्यसेना के साथ भीषण संग्राम, कार्तिकेय का धर्म… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-118 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-118 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ अठारहवाँ अध्याय कल तथा विकल नामक दैत्यों का चतुरंगिणी सेना लेकर युद्धके लिये प्रस्थान, देवसेना में से सेना लेकर पुष्पदन्त तथा वृष का उन दोनों के साथ भयंकर संग्राम, वीरभद्र और षडानन द्वारा दोनों दैत्यों का वध, दैत्य सैनिकों द्वारा युद्ध का समाचार दैत्यराज सिन्धु को देना अथः… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-117 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-117 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ सत्रहवाँ अध्याय पराजित होकर दैत्यराज सिन्धु का अपने भवन में आकर अत्यन्त चिन्ताग्रस्त होना, उसकी पत्नी दुर्गा का वहाँ उपस्थित होना, दुर्गा के पूछने पर दैत्यराज सिन्धु का अपनी चिन्ता का कारण बतलाना, दुर्गा का उसे समझाना तथा मयूरेश से सन्धि करने के लिये कहना, किंतु सिन्धु का… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-116 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-116 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ सोलहवाँ अध्याय देव मयूरेश द्वारा सिन्धु दैत्य पर विजय प्राप्ति करने पर मुनिगणों तथा देवी पार्वती एवं शिव का उनके दर्शन के लिये आना, युद्ध में मृत देवगणों को खोजने के लिये मयूरेश तथा मुनिगणों का जाना, देव मयूरेश द्वारा मृत देवों को अपने शरीर की वायु के… Read More